बुखार : जरुरी नहीं कि ‘कोरोना’ हो, ‘मलेरिया’ भी हो सकता है
■ मलेरिया का उपचार और जाँच पीएचसी व सीएचसी केन्द्रों व जिला चिकित्सालय में निःशुल्क
मऊ। कोरोना वायरस के संक्रमण से दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है और सभी ने इससे बचने के लिये स्वच्छता को अपना हथियार बना लिया है। लेकिन स्वच्छता के आभाव में फैलने वाली और भी कई बीमारियाँ है जिसमें मच्छर से फैलने वाला मलेरिया प्रमुख है। इससे बचाव के लिये जिले में घर-घर जाकर विभिन्न जन जागरूकता के कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर सतीशचंद्र सिंह ने बताया कि मलेरिया भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक संकट बना हुआ है और इससे बचने का कोई दूसरा तरीका नहीं है। बल्कि स्वच्छता और थोड़ी सी सावधानी का ख्याल रखा जाए तो मलेरिया के बुखार से बचा जा सकता है। यह मलेरिया गंदगी से पैदा होने वाली बीमारी है और उससे बचने का केवल एक मात्र उपाय जागरूकता और स्वच्छता है। मलेरिया के बुखार का जाँच और इलाज जिले के सदर हास्पिटल समेत सभी पीएचसी व सीएचसी केन्द्रों पर विशेषज्ञ व चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क किया जाता है।
नोडल अधिकारी डॉ वीके वर्मा ने बताया कि मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो परजीवी प्लाज्मोडियम वाइवेक्स के कारण होता है तथा संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह वायरस व्यक्ति की लाल रक्त कणिकाओं में फैल जाते हैं जिसके कारण मलेरिया होता है। बुखार आने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाए। किसी भी व्यक्ति को बुखार हो तो बिना चिकित्सक के परामर्श के दवा नहीं देना चाहिये।
जिला मलेरिया अधिकारी बेदी यादव ने बताया कि मलेरिया रोग से होने वाले खतरे से बचने को इसी रविवार से आशा, एएनएम एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा घर-घर ‘हर रविवार मच्छर पर वार’ तथा रविवार को ‘ड्राई डे’ स्लोगन का प्रचार-प्रसार कर जनमानस को जागरूक किया जाएगा।
उन्होंने आगे बताया कि सभी लोग अपने घर के आस-पास सफाई रखें, जल भराव न होने दें क्योंकि बरसात के समय में गड्ढों में, बड़े बर्तनों में, टायरों में जल जमा हो जाता है। ज्यादा दिन तक एक ही स्थान पर इकट्ठा रहने के कारण मच्छर के अंडाणु पानी में पनपते हैं, और ज्यादा संख्या में मच्छरों को जन्म देते हैं और इन्ही मच्छरों के काटने से हम सभी मलेरिया के गिरफ़्त में आ जाते हैं, इसलिए सोर्स रिडक्शन के अंतर्गत अपने घरों में एकत्रित जल स्त्रोतों को साफ करना चाहिए।

