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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं

इलाहाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। इस मामले में पूर्व में फुलकोर्ट द्वारा बेंच न बनाने का निर्णय ही लागू रहेगा। यह जानकारी हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष आईके चतुर्वेदी ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के बाद दी है। अध्यक्ष ने बताया कि बार कार्यकारिणी ने अपने वादे के मुताबिक अधिवक्ताओं को मेडिकल क्लेम देने की योजना पर भी विधिवत काम शुरू कर दिया है।
अध्यक्ष ने बताया कि हाईकोर्ट की बेंच को लेकर पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में वकीलों की हड़ताल को लेकर बार के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की है। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि फिलहाल इस मामले में फुलकोर्ट द्वारा लिया गया बेंच नहीं बनाने का निर्णय ही लागू है। यदि भविष्य में ऐसा कोई प्रकरण विचारार्थ आता है तो हाईकोर्ट बार और सभी न्यायाधीशों को विश्वास में लिया जाएगा। श्री चतुर्वेदी ने बताया कि मेडिकल संबंधी मामले में संशोधन हेतु सदस्यों से प्रस्ताव आमंत्रित किया गया है। इसे ड्राफ्ट कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इस बीच पांच जनवरी से 17 फरवरी के बीच प्राप्त आवेदनों में से कुल 31 आवेदन चिकित्सा सहायता के लिए छह विधवा पेंशन और पांच मृतक आश्रित सहायता के लिए प्राप्त हुए हैं जिनका निस्तारण कर दिया गया है। कल्याणकारी योजनाओं के भुगतान हेतु एक समिति गठित की गई है जिसकी संस्तुति पर ही पर क्लेम पास किए जा रहे हैं।
अध्यक्ष ने बताया कि इसी क्रम में बार के सदस्य मनीष द्विवेदी को बार के विरोध में कार्य करने और उसे प्रचारित कर बार की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। कार्यकारिणी ने उनसे स्पष्टीकरण मांगने का निर्णय लिया है।

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