शोक संदेश

नहीं रहे, अभी उम्मीद ज़िन्दा है के विचार सम्पादक शिवकुमार राय

(धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव)

थोड़ी देर पहले गाज़ीपुर से रमेश यादव ने सूचना दी कि शिवकुमार राय जी नहीं रहे। उनका पटना में निधन हो गया। वह अपने छोटे भाई रिटायर्ड आई ए एस श्री बृजराज राय के यहाँ थे।
विश्वास नहीं हुआ, इसलिए उनके अनुज वरिष्ठ पत्रकार श्री राजेश राय को काल किया तो जवाब में किसी से भी टकरा जाने की हिम्मत रखने वाले राजेश के हर शब्द थरथरा रहे थे।
बात खत्म होते ही – अभी उम्मीद ज़िन्दा है – के सम्पादन का केंद्र रहे डाक्टर रईस खान का काल आया क़ि नहीं रहे हमारे शिवकुमार भाई।

मेरी उनकी मुलाकात 1977 के लोकसभा चुनाव में हुई थी। वह जनता पार्टी के उम्मीदवार वरिष्ठ स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी पूर्व सांसद बाबू गौरीशकर का प्रचार करने लिए कलकत्ता से जीप लेकर आए थे।
जादवपुर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग के स्नातक शिवकुमार राय हिन्दी अंग्रेजी के साथ बंगला भी बोलते थे। वह मानते थे कि भूमिहार के अलावा भी बहुत सारे लोग दुनियां में रहते हैं। इसलिए वह मेरे ऊपर भी कृपा रखते थे।

वैसे वह मेरे बड़े भाई श्री वीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव जो इलाहाबाद बैंक कमर्चारी यूनियन के नेता थे और ससुर श्री त्रिभुवन नाथ श्रीवास्तव जो डानवास्को, पार्कसर्कस, कलकत्ता में लेक्चरर थे, के मित्र थे, इसलिए स्नेह कुछ और बढ़ जाता था।
वह वरिष्ठ स्वतन्त्रता सेनानी पूर्व सांसद गौरीशंकर राय के जीवन काल में भी प्रिय लोगों में थे। राय साहब के नहीं रहने पर भी वह इस रिश्ते को अनवरत जीते रहे।
श्री गौरीशंकर राय महिला पीजी कालेज, बलिया के हर ईंट पर उनकी उंगलियों के निशान हैं। उनके निधन से बाबू गौरीशंकर राय के पुत्र श्री पारस नाथ राय, श्री वीरेंद्र राय, श्री अतुलशंकर राय और कॉलेज परिवार ने अपने परिवार का एक प्रमुख सदस्य खो दिया।
वह असमय के दोस्त थे। वर्तमान में जब मऊ के विधायक श्री मुख्तार अंसारी को लेकर सांसद श्री अफजाल अंसारी भी शासन के निशाने पर हैं, लेकिन भाई शिवकुमार राय पर इसे लेकर कोई फर्क नहीं पड़ा। वह अंतिम समय तक सांसद अफजाल के साथ अपनी दोस्ती जीते रहे। उनके निधन से पूर्व ब्लाक प्रमुख लुट्टर राय ने अपना एक प्रमुख स्तम्भ खो दिया।

मेरे उनके रिश्ते को समझने के लिए दो घटनाओं की चर्चा जरूरी है।
मैं भभुआ ( बिहार ) में दैनिक जागरण का दफ्तर खोलवाने के लिए गया था। होटल में सुबह सुबह 6 बजे होटल मालिक दरवाजा खटखटाने लगा।दरवाजा खोला तो उसके साथ जिला कचहरी की वर्दी वाला अर्दली भी था। उसे देखकर मैं घबराया कि रात को कहीं कुछ हो गया क्या ? उससे पूछता कि एक आवाज गूंजी कि भैया प्रणाम। मैं बृजराज राय, बाबू शिवकुमार राय का छोटा भाई।
बाबू बृजराज राय अब रिटायर आई ए एस हैं। उस समय पद पर थे।
दूसरी घटना बाराबंकी की है। अवसर था, अभी उम्मीद ज़िन्दा है – के नायक वयोवृद्ध समाजवादी श्री सगीर अहमद की जयंती का। आयोजन स्थल स्थल था, बाराबंकी, आयोजक थे, समाजवादी योद्धा श्री राजनाथ शर्मा, कर्ता धर्ता थे, श्री पाटेश्वरी प्रसाद। शिवकुमार भाई ने बिना किसी राय बात के घोषणा कर दी कि सगीर साहब के संस्मरणों को सँजोकर एक पुस्तक लिखी जाएगी जिसका सम्पादन करेंगे धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव। प्रकाशित कराएगा, श्री गौरीशंकर राय स्मृति संस्थान। उनकी लगन और श्री पारस नाथ राय, श्री वीरेंद्र राय, श्री अतुल शंकर राय और डाक्टर कुद्दूस हाशमी के स्नेह से अभी उम्मीद ज़िन्दा है – प्रकाशित हुई जिसे लेकर समाजवादी आन्दोलन के वरिष्ठतम साथियों में एक
प्रोफेसर डाक्टर राजकुमार जैन कहते हैं कि तुमने लिखा बहुत कुछ है, राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर और लोकबन्धु राजनारायण के विचारों को भी सँजोया है लेकिन कोई पुरष्कार देने का अधिकार मुझे मिला तो मैं तुम्हें अभी उम्मीद ज़िन्दा है – को लेकर बड़ा से बड़ा पुरस्कार दे सकता हूँ।

आप पद पर हो आपकी बात मानने वाले सैकड़ों मिलेंगे लेकिन आप पद पर नहीं हों और कोई मजबूत आदमी आपकी बात मान ले तो उस आदमी का नाम शिवकुमार राय कह सकते हैं।
इसी साल की एक घटना है।औढारी मठ, सिखड़ी, गाज़ीपुर में शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित 31 जोड़ों के सामूहिक विवाह के आयोजक रमेश यादव और रामाश्रय चौहान ने इच्छा व्यक्त की कि इस अवसर पर सांसद श्री अफजाल अंसारी भी रहें। मैंने पूछा कि दिक्कत क्या है? जवाब था, सपा बसपा के बिगड़ गए रिश्ते। मैंने शिवकुमार राय से कहा। उन्होंने कहा कि आप सांसद परिवार की दिक्कतों से वाकिफ हैं। कोर्ट का मसला नहीं फँसा तो वह आएंगे। जहाज से भी आना होगा तो आएंगे और वह जहाज से बनारस आये। फिर बनारस से कार से औढारी मठ।
काल ने आज उस शिवकुमार राय को मुझसे छीन लिया। उनकी मौत पटना में हुई लेकिन इसे सुनकर मुरादाबाद में पूर्व विधायक सौलत अली, बदायूं में
पूर्व जज बीडी नकवी, सपा नेता शोबी, नकवी, सहसवान सपा के नगर अध्यक्ष
शोएब नकवी के यहां मातम पसरा है।
काल के फैसले पर कोई टिप्पणी उचित नहीं है, फिर भी यह कह रहा हूँ कि काल ने यह अच्छा नहीं किया। उसने भाई शिवकुमार राय के साथ हम लोगों से कमजोरों की आवाज छीन लिया और मुझसे मेरा दोस्त। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। उनके परिजनों और चाहने वालों को यह दुःसह दुख सहने की शक्ति दे।


सम्पादक
राष्ट्र पुरुष चन्द्रशेखर सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है
चित्र परिचय – 1 – शौबी नकवी, धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव, शिवकुमार राय और शुएब नकवी, 2- शिवकुमार राय बोलते हुए, 3 – धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव और शिवकुमार राय

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