रचनाकार

कुछ अलग : “हमारा प्यारा रिक्शा”

“काले और पीले रंग से सजा संवरा मेरा महबूब,

हवा के झोके की तरह बगल से गुजर जाते हो तुम।

नजर न लगें तुम्हें इसलिए करते है हम कितने जतन,

तुम हो मेरे साथ तभी तो चल रहा सुख से मेरा जीवन।”

( वर्षा )

वो रस्ते पर काले और पीले रंग से रंगा वो खुबसुरत सा चमचमता रास्ते पर इठलाता, लोगों के दिलों की धडकने बढाकर साइड से हवा के छोके की तरह निकलने वाला ये रिक्शा अपनी रफ़्तार पर कितना इतराता है जैसी भी है पर वो हमारे जीवन में एक बहुत ही अहम किरदार निभाता है। वो अनेक रूपों में हमारें सामने आता है वो महज एक रिक्शा नहीं है वो भाई का फर्ज निभाता है एक किस्सा सुनाती हूँ एक बार मुझे इंटरव्यू के लिए जाना था और मेरी गाड़ी ख़राब हो गई तब मुझे काफी लेट हो रहा था और मुझे समझ नहीं आ रहा था की अब मैं क्या करूं तब अचानक से पिली चमचमाता एक रिक्शा मेरे सामने रुका और वहां से आवाज आई की क्या हुआ सिस्टर तब मैंने उन्हें कहाँ की भैया मुझे आज बहुत जरुरी काम है मैं लेट हो रही हूँ और मेरी स्कूटी भी बिच रास्ते में खारब हो गई समय पर यदि ना पहुंची तो मेरे सपने टूट जायेंगें तब उन्होंने कहाँ सिस्टर आप गाड़ी को साइड में खड़ा कर दीजिये और मैं आपको छोड़ देता हूँ वापसी में आते वक्त मैकेनिक को ले आइयेगा और ठीक करवा लीजियेगा मैंने भी स्कूटी को झट से एक दूकान की पार्किंग में पार्क की और हाथ की कलाई में बंधी घड़ी की और देखी और झट से उस रिक्शा में बैठ गई और इंटरव्यू देने के लिए चली गई और इस रिक्शा की वजह से समय पर पहुँच पाई थी जिसके कारण मेरी लाइफ की पहली नौकरी मुझे मिली थी खैर आज भी ये मेरा बहुत साथ देता है कभी जब मैं अंजान शहर में जाऊं या कभी किसी मुसीबत में आ जाऊं तो जब भी इसे याद करती हूँ ये इठलाता रोड पर मुझे तकता हुआ दिख ही जाता है |ऐसे ही कई किस्से हमारी लाइफ में घटते है ये कभी किसी के लिए एम्बुलेंस बन जाता है या कभी स्कुल बस बन जाता है ये गरीबों के लिए ऑडी है किसी के प्यार की पहली मुलाक़ात की गवाह भी बन जाता है तो कभी बजुर्गों के बुढ़ापे का सहारा बन जाता है |इससे कईयों को रोजगार मिलता है कितने के घरों में इसी की वजह से चुला जलता है ,इसी की वजह से कोई बच्चा IPS/ IAS बनता है और कभी-कभी किसी के लिए फ़रिश्ता भी बन जाता है। समय के अनुसार ये अपने आपको सजाता सवारता रहता है मगर अपने काम को इमानदारी से करता है ।जैसे हर राज्य की बोली अलग होती है वैसे ही रिक्शा के भी अलग-अलग रूप देखने को मिल जायेंगें वैसे गुजरात का रिक्शा काफी रंगीन मिजाज होता है और वहीँ कोलकत्ता के रिक्शा में शालीनता झलकती है। पहले हाथ के रिक्शे चला करते थे फिर पेट्रोल वाले और अब बैटरी वाले रिक्शे चल रहे है । जैसे भी हो ये पर हमारें लिए अनमोल होता है हमारा प्यारा रिक्शा ।

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