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समकालीन हिन्दी काव्यधारा के मूर्धन्य कवि डॉ0 केदारनाथ सिंह के निधन पर मऊ के सहित्यकारों ने दी विनम्र श्रद्धांजलि

मऊ। हिन्दी साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं ‘शब्दिता‘ एवं ‘प्रत्यय‘ के संयुक्त तत्वावधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन शब्दिता के सम्पादक डॉ0 कमलेश राय के सहादतपुरा स्थित आवास पर किया गया जिसमें समकालीन हिन्दी काव्यधारा के मूर्धन्य कवि डॉ0 केदारनाथ सिंह के अवदान पर चर्चा करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धान्जलि दी गयी।
प्रत्यय के सम्पादक डॉ0 शर्वेश पाण्डेय ने कवि केदार नाथ सिंह को गांव और शहर के द्वन्द्वात्मक जीवन का अप्रतिम चितेरा बताया तथा उन्हें तीसरे सप्तक के सबसे बड़े कवि के रूप में याद किया।
डॉ0 कमलेश राय ने कहा कि लगभग चार दशक से समकालीन हिन्दी कविता का प्रतिनिधित्व करने वाले कवि केदारनाथ सिंह अकादमिक हिन्दी कविता के मानक सन्दर्भ रहे हैं। इनके आकस्मिक निधन से जो रिक्ति हुई है, उसे भर पाना सम्भव नहीं है। ‘अभी बिल्कुल अभी‘ ‘जमीन पक रही है‘ यहाँ से देखो उत्तर कबीर एवं अन्य कविताओं सहित समय के सच को रेखान्कित करती ‘बाघ‘ जैसी लम्बी कविता का प्रणयन किया है जो हिन्दी साहित्य की अमूल्यनिधि है।
इसी क्रम में डॉ0 रामनिवास राय ने डॉ0 सिंह की आलोचकीय प्रतिभा का रेखाकंन करते हुए कहा कि हिन्दी की समालोचना धारा को सृजनात्मक स्वरूप प्रदान करने में डॉ0 सिंह की अग्रणी भूमिका रही है। इन्हें साहित्य के श्रेष्ठ ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी सम्मान तथा व्यास सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। डॉ0 चन्दप्रकाश राय ने कहा कि हमें गर्व है कि वे हमारे पूर्वांचल के चर्चित जनपद बलिया के चकिया ग्राम 19 मार्च, 1918 को पैदा हुए थे तथा 1956 में बी.एच.यू. वाराणसी से हिन्दी में एम.ए. एवं 1964 में पी-एच.डी. की उपाधी प्राप्त की थी। उनका लेखकीय अवदान हिन्दी साहित्य में हमेशा आदर के साथ याद किया जायेगा। संगोष्ठी में महामृत्यन्जय तिवारी, संतोष मिश्र, रविश तिवारी, विशाल पाण्डेय, सहित अन्य साहित्यकार एवं बुद्धजीवी उपस्थित रहे। अन्त
में दो मिनट का मौन रखकर समय के श्रेष्ठ कवि को विनम्र श्रन्द्धाजली दी गयी।
प्रस्तुतिः डॉ0 चन्दप्रकाश राय

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