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अपने ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे ओमप्रकाश राजभर, जश्न से रहे दूर, राज्यसभा में मतदान को लेकर संशय

(आनन्द कुमार)

मऊ। बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना, ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना, दुल्हन बनूंगी मैं डोली चढ़ूंगी मैं, दूर कहीं बालम के दिल में रहूंगी मैं, तुम तो पराये हो यूं ही ललचाये हो, जाने किस दुनिया से, जाने क्यों आए हो ? ….बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना, यह फिल्मी गाना भले ही बेगानी शादी के नाम पर चर्चित हुआ था लेकिन वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में सहयोगी दल की विशेष भूमिका निभा रहे हैं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर पर बिल्कुल फिट बैठ रही है। बस अंतर इतना ही है कि यह गाना बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना रिल लाईफ के नाम पर थी, लेकिन यह बेगानी शादी नहीं है, यह अपनी ही सरकार के वर्षगांठ का उमंग और तरंग है। इसमें रियल लाईफ में अब्दुल्ला बने ओमप्रकाश राजभर काफी दीवाना तो हैं लेकिन अपनी ही सरकार से नाराज चल रहे हैं।

नाराजगी का आलम यह है कि सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार अपने एक साल पूरे होने का जश्न मना रही थी तो उसमें सहयोगी दल के रूप में सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया वह कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर शामिल नहीं हुए। इतना ही नहीं ओमप्रकाश राजभर को सरकार के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना लेने तक घर गए और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय ने फोन करके आने का न्योता भी दिया, लेकिन वह नहीं आए।

भाजपा भले ही अपने एक साल कि यूपी सरकार का जश्न मनाएं। लेकिन ओमप्रकाश राजभर का दो टूक में कहना है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गरीबों के आवास, स्वास्थ्य, शौचालय, राशन कार्ड व शिक्षा के मुद्दे पर पूरी तरह फेल है। अपने ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार का दावा भ्रष्टाचार को समाप्त करने का पूरी तरह फेल है उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि गांव- गांव में राशन, सरकारी आवास, शौचालय के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है जबकि सरकार काशी, मथुरा अयोध्या के विकास और गंगा की सफाई के नाम पर लगी हुई है।

बार-बार प्रदेश सरकार के कार्यों पर सवाल उठा रहे हैं सहयोगी दल के रुप में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि वह राज्यसभा में मतदान का निर्णय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बातचीत करने के बाद ही लेंगे। अगर अमित शाह से बात होती है तो उनकी पार्टी मतदान में शामिल होगी। अगर बात नहीं हुई तो मतदान में शामिल नहीं होगी। उन्होंने राज्यसभा में मतदान को लेकर संशय की स्थिति पैदा कर दी है। अगर अमित शाह से मुलाकात नहीं हुयी और वे मतदान से बाहर रहे तो फिर विपक्ष की बल्ले-बल्ले भी हो सकती है।

उन्होंने सपा- बसपा गठबंधन में शामिल होने के सवाल पर दो टूक में कहा कि जब तक भाजपा के लोग खुद नहीं कहेंगे कि तुम भाजपा छोड़ कर चले जाओ तब तक वह भाजपा गठबंधन के साथ हैं। उन्होंने कहा कि वह गरीबों और पिछड़ों के के मामले में लड़ाई लड़ते हैं और लड़ते रहेंगे। उन्होंने गरीबों के सवाल पर सरकार को दस में से जीरो अंक और अमीरों के नाम पर तीन नंबर दिया।
ऐसे में बार बार भाजपा सरकार पर सवाल उठाने वाले ओमप्रकाश राजभर पार्टी में रहकर ही भाजपा का विरोध करते आ रहे हैं। जहां भाजपा राज्यसभा जीतने के लिए एड़ी चोटी एक की हुई है। ऐसे वक्त पर ओमप्रकाश राजभर की चेतावनी की अमित शाह से बात हुई तो ठीक वर्ना वे राज्यसभा के चुनाव से अलग रहेंगे भाजपा के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इसके अलावा सुभासपा ने भाजपा के उपचुनाव में हार पर भी खुद की पार्टी को अलग रखने पर पार्टी द्वारा नाराजगी व्यक्त किया जा चुका है।

ऐसे में बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना का यह गाना यही चरितार्थ करता है कि खुद के सरकार के सालगिरह में अब्दुल्ला यानी ओमप्रकाश राजभर नाराज हैं। उन्हें भाजपा कैसे मनाती है यह भाजपा की समस्या है लेकिन ओमप्रकाश राजभर की नाराजगी ऐसे ही बढ़ती रही तो आगामी लोकसभा 2019 के चुनाव में भाजपा के लिए बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर देगी।

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