रचनाकार

सब बा कहेके आपन, आपन भी पास नईखे

( अखिलानंद यादव )

हालत सबकर एक भईल
केहू… त खास नईखे…..
सब बा कहेके आपन
आपन भी पास नईखे…..__@

लाश- लाश पर लाश दिखे
चमकत चेहरा मुरझाईल बा
आगे पिछे मौवत मडराए
विज्ञान के मती मराइल बा

डर डर के सब जीनगी जिए
केहू बिंदास नईखे….
सब बा कहेके आपन
आपन भी पास नईखे….. ____1

पइसा – पइसा सब कहेला
पइसा हाथ के मईल बा
फिर का लौट के आई जग में
जे.. इहवा से गइल बा

झर- झर लोर झरे अंखियां से
केहू झकास नईखे…
सब बा कहेके आपन
आपन भी पास नईखे.…______2

सत्ता लोभी सरकार बनल बा
काम ना कौनो बा हक में
जान बूझ ना सूझ दिखावे
लोग पड़ल बा झंझट में

समय – समय पर चोट मिलल
फिर भी एहसास नईखे….
सब बा कहेके आपन
आपन भी पास नईखे..…._______3

जब – जब घोर घिनौना काम
एह दुनियां में होई हो
प्रकृति पल पल सबक सिखाइ
अखिल आगन में रोई हो

मौत अटल-अडिग बा जग में
केहू के दास नईखे….
सब बा कहेके आपन
आपन भी पास नईखे..…._______4

रचनाकारर – अखिलानंद यादव
रतनपुरा मऊ
9450461087

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