दिव्य सेवा समिति ने मनाई पण्डित अलगू राय शास्त्री की जयंती
मऊ। बडरावं विकासखंड के अन्तर्गत पकड़ी खुर्द ग्रामसभा में सोमवार को पण्डित अलगू राय शास्त्री की जयंती पर उनको दिव्य सेवा समिति के सदस्यों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
संस्था के संस्थापक युवा समाजसेवी दिव्येन्दु राय ने कहा की आज के ही दिन 29 जनवरी 1900 पण्डित अलगू राय शास्त्री जी का ग्राम अमिला जनपद मऊ में हुआ था। किन्ही अर्थो में शास्त्री जी के जीवन में मातृमान,पितृमान,अचार्यवान की सूक्ति चरितार्थ हुई है।शास्त्री जी के पिता जी साधु प्रबृत्ति के सज्जन व्यक्ति थे।
1942 के आंदोलन में शास्त्री जी के सन्युक्त परिवार के मकान को जब अंग्रेजी सिपाहियों ने 2 बार फूंका था तब 76 वर्षीय इस बृद्ध तपस्वी को भी बन्दूक के बट से मारा था।
शास्त्री जी ने अपने जीवन का सर्वोत्कृष्ट वक्त हरिजनों की सेवा में लगाया,और1924 में लाला लाजपत राय के लोक सेवक मण्डल के आजीवन सदस्य के रूप में जो बहुमूल्य सेवा इस क्षेत्र में की है,उसका ज्वलन्त उदाहरण मेरठ का कुमार आश्रम।
1920, 30, 32, 33, 40, और 1942 से 1946 तक अलगू राय जी कारावास में रहे। सन 1930 में शंकर के वेदान्त भाष्य का हिन्दी अनुवाद,1932 में सर्वदर्शन परिचय,1942 से 1945 तक कारावास में रहते हुए ऋग्वेद रहस्य की रचना की।
देश की स्वाधीनता के बाद उनके विचारों की प्रखरता में और भी जीवन आगया। कुशल वक्ता, सिद्ध लेखक और स्पष्ट विचारक तीनों ही गुणों का सम्मिश्रण हमें शास्त्री जी में मिलता था।आपने संविधान सभा के सदस्य की हैसियत से अनेक महत्वपूर्ण वक्तब्य विधान बनाने के अवसर पर दिये।जिनमें उल्लेखनीय है “विभाजन के समय हिन्दुयों पर होने वाले अत्याचार के प्रति इनकी कटु आलोचना”,भारतीय संविधान की भूमिका के सम्बन्ध में दिया गया भाषण।
हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने के अवसर,मौलिक अधिकारों के सम्बन्ध में इनके अपूर्व भाषण की प्रशंसा भारत सरकार के कानून मंत्री डॉक्टर अम्बेडकर ने अपने भाषण में की थी।
संविधान के तृतीय वाचन में इनका 34 मिनट का सारगर्भित भाषण हमारे वैधानिक साहित्य में सदा अपना महत्व रखेगा।
समय के आवेश में विवेकहीनता लोगों को विवश करती है कि वे अपने पथ प्रदर्शक को न माने।शास्त्री जी के साथ यही हुआ।अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर वे सदैव आगे बढ़ते गये और बहुत समय तक उत्तर प्रदेश की राजनीति को इच्छानुसार मोड़ देते रहे। 12 फरवरी 1967 को शास्त्री जी स्वर्ग सिधार गये। स्व० पण्डित अलगू राय शास्त्री जी ने अपने विद्वता के बल पर घोसी लोकसभा को पूरे देश मे एक अलग पहचान दिलाई थी।
दिव्य सेवा समिति के कुँवर बदल गोस्वामी ने कहा की पण्डित अलगू राय शास्त्री जी से आजकल के नेताओं को सीख लेने की जरूरत है और विशेषकर धन के लोलुप उन नेताओं को जो सत्ता सुख और धन की चाह में बार बार दल बदल रहे हैं।
राधेश्याम राम ने कहा की पण्डित अलगू राय शास्त्री ने सदैव हम दलित जनमानस को अपने ह्रदय से लगा कर रखा और सदैव हमारे हित मे कार्य किया। इस अवसर पर पण्डित अलगू राय शास्त्री को अम्बुज,सौरभ, देव आदि ने श्रद्धासुमन अर्पित किया।

