विजयदशमी पर्व पर RSS ने MAU में मनाया स्थापना दिवस
■ संकल्प : स्वदेशी वस्तुओ का करेंगे उपयोग, स्वयंसेवकों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा
उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में विजयदशमी पर्व पर विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मऊ द्वारा रविवार को स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर एक दिन पहले से ही पूरे नगर क्षेत्र को भगवा रंग के झंडे से सजाया गया फिर नगर के कोने-कोने से सैकड़ों स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में रामस्वरूप भारती इंटर कॉलेज परिसर स्थित मैदान में उपस्थित हुए, और कोविड-19 प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करते हुए विजयादशमी उत्सव को हर्ष और उल्लास के साथ मनाया। स्वयंसेवकों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों का पूजन किया।
संघ चालक मोहन भागवत ने विजयदशमी व स्थापना पर्व, प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने मन की बात में , प्रांत प्रचारक सुभाष जी ने शस्त्र पूजन पर सभी ने मंचो से देश , लोकल उत्पाद के प्रयोग के लिये आह्वान किया।

गोरक्ष प्रांत के प्रान्तप्रचारक ने बताया कि आज ही के दिन विजयदशमी 1925 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी। संघ 95 वर्षों से बुराई पर अच्छाई को प्रतिस्थापित करने के अभियान में लगा हुआ है। आज का उत्सव भी लोगों के शारीरिक, चारित्रिक, मानसिक,सांस्कृतिक एवं सांगठनिक उन्नति का महापर्व मनाया गया। विजयादशमी किसी राजा के विजय के उपलक्ष में नहीं बल्कि रावणत्व पर रामत्व की विजय के उपलक्ष में मनाई जाती है। आज ही के दिन 9 दिन युद्ध करने के पश्चात शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा ने असुरत्व और बुराई के प्रतीक महिषासुर का वध किया था। हमारी संस्कृति वीरों की पूजा करने वाली संस्कृति है। समाज की उन्नति के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शस्त्र के अभाव में शास्त्रों की रक्षा असंभव है। इसी उद्देश्य से महर्षि विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को वन लेकर गए।

चाणक्य ने इसी उद्देश्य के लिए चंद्रगुप्त मौर्य को प्रशिक्षित किया और इसी दृष्टि से संघ शास्त्र और शस्त्र दोनों की पूजा का संस्कार समाज में डालना चाहता है।
विजय, शौर्य, संयम,धैर्य, असत्य पर सत्य की विजय शक्ति की पूजा एवं संघ की स्थापना का दिन है। हिंदू समाज पूरे विश्व में अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में विजयदशमी का पर्व मना रहा है।
यही विजयदशमी का संदेश है लोगों को अपना बनाने का गुण हमेशा व्यक्ति को विजयी बनाता है। भारत की भूमि भोग भूमि नहीं बल्कि कर्म और त्याग की भूमि है। भारत कभी भी पराजित नहीं रहा सभी आक्रांताओं का मान मर्दन करने के लिए भारत भूमि ने वीर पुत्रों को जन्म दिया है। संघर्ष हमेशा जारी रहा अंग्रेजों की गुलामी का प्रतिकार भी मजबूती से होता रहा। मदन लाल, धींगरा सरदार उधम सिंह, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह ,सुभाष चन्द्र बोस आदि धरती पुत्रो ने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था।

