रक्तदान ही महादान हौ, सब कर जान बचाई हो, कई के रक्तदान हे बेटवा, लेता नाम कमाई हो।
( सूबेदार पाण्डेय कवि )
रक्तदान ही महादान हौ, सब कर जान बचाई हो।
कई के रक्तदान हे बेटवा, लेता नाम कमाई हो।
बनि के दानी नाम कमंइबा,
अपने खून से जान बचइबा।
मानव से देवता बनि जइबा,
किरति रोज गवाई हो।
।। रक्तदान ही महादान हौ।।1।।
शिवि दधिची त दान के खातिर,
आपन जान गवउलै।
जीवन कइ रक्षा कइके,
उ किर्ति अमर कइ गइलै।
वोहि दान के खातिर राजा,
हरिश्चंद्र बिक गइलै।
फिर भी आपन टेक न छोडलैं
नाम अमर कइ गइलैं।
।। रक्तदान ही महादान हौ।।2।।
अतुलनीय इ रक्तदान बा,
ना कवनों एहिसे नुकसान ।
लेकिन तोहरे खून के देहले
बचि जाइ केहू कै प्राण।
परहित सरिस धर्म ना दूजा,
तोहरे करम ही तोरी पूजा।
महामानव बन नाम कमाला,
अइसन अवसर ना आई हो।
।। रक्तदान ही महादान हौ।।3।।
यह मेरी अपनी मौलिक रचना है इसका
कापी राइट सुरक्षित है।
रचनाकार—–सूबेदार पाण्डेय कवि
आत्मानंद जमसार सिंधोरा बाजार वाराणसी पिन 221208
मोबाइल 6387407266

