रचनाकार

मेरे लिए मेरी बेटियां

■ रमा भारती

( एक मां द्वारा अपनी बेटी “आराध्या” व “अभिषि” के प्रति शब्दों का सृजन जो हर बेटी के लिए हर मां की ओर संदेश दिया है )

आग उगलती धूप भी सुहानी लगती है
मेरी बेटियाँ जब मेरे पास होती है
एक सुखद एहसास मुझे देती है
मेरी बेटियाँ जब मेरे साथ होती है!!!


मेरे पेट में तुम्हारा चुल्बुलाना
आज भी मुझे गुदगुदाता है
मेरे दूध पीते ही तुम्हारा उछलना
आज भी मुझे भाव-विभोर करता है!!!

औरत बनकर मैंने जन्म लिया
माँ बनाकर तुमने पूर्ण किया
सिर्फ बेटी नहीं संजीवनी हो
क्या कहूँ मैं तुम परियों को
सिर्फ ज़िन्दगी नहीं मेरा आधार हो!!!!

दुनिया में माँ अनमोल धरोहर है
ये धरोहर तुमने मुझे बनाया है
माँ के रूप में चुनकर तुमने मुझे
मेरी नज़रों में उत्तम बनाया है!!!

आज मैं तुम्हें डाँटती हूँ डराती हूँ
कल तुम मुझे दुनियादारी समझाओगी
तब मेरे होंठों पे हल्की मुस्कान आएगी
क्योंकि तुममें मुझे मेरी माँ नज़र आएगी!!!!

सुधा रस बनकर आई है मेरी बेटियाँ
अपनी एक-एक मुस्कान से मेरी
ममता को आह्लादित करती है बेटियां
जाने देवी का कौन सा रूप लेकर आई है
आंखों में आँसू और चेहरे पे हँसी
एक साथ लाती है मेरी बेटियाँ!!!!

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