“प्राणायाम” और “ध्यान” फेफड़ों व मष्तिष्क की कोशिकाओं को बनाता है अक्रिय से सक्रिय
आज भारत वायरस जन्य रोग कोविड 19 के दूसरे लहर के प्रकोप से पीड़ित है, इस परिस्थिति में महर्षि पतंजलि प्रणीत अष्टांग योग की यौगिक जीवन शैली की प्रासंगिकता बढ़ गयी है, जो हमें आपातकालीन चिकित्सा से बचाती है और हमें समग्र स्वास्थ्य की ओर अग्रसर करती है।
आयुष विभाग के योग इंस्ट्रक्टर विश्वा गुप्ता ने बताया कि कोरोना वायरस सामान्यतः हमारे आंतरिक अंग फेफड़े की कार्यक्षमता को सबसे अधिक कुप्रभावित करता है।
अष्टांग योग के अंतर्गत यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि आते हैं।
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए व कोरोना के सामान्य व मध्यम संक्रमण होने की स्थिति में मुख्य रूप से हमें प्रातः काल में हल्के उष्ण या सामान्य जल से उषापान करना चाहिए ततपश्चात शौच से निवृत्ति बाद सामान्य जल से नियमित स्नान करें व अपने इष्टदेव/गुरु/प्रिय व्यक्ति या वस्तु का ध्यान, साधना, सकारात्मक सोच का पालन करना चाहिए। प्रति दिन प्रातः 10 बजे से पहले आधा घण्टे धूप का सेवन करना चाहिए और छोटे छोटे जॉइंट्स को खोलने वाले हल्के यौगिक सूक्ष्म व्यायाम, ओम का सस्वर उच्चारण(5 आवृत्ति) गायत्री मंत्र का सस्वर उच्चारण(3 आवृत्ति), भस्त्रिका प्राणायाम(3 मिनट)नाड़ी शोधन(अनुलोम- विलोम) प्राणायाम( 5 से 10 मिनट), उज्जायी प्राणायाम(3 से 5 बार) कपालभाति क्रिया(5 मिनट) सूर्यभेदी प्राणायाम(2 मिनट) और हँसोदक क्रिया, सूर्य आलिंगन(चेस्ट एक्सपैंशन) करना व सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से पेशियों की आकुंचन, प्राकुंचन होने से हमारे फेफड़े की कार्यक्षमता,रोग प्रतिरोधक व मानसिक आत्मिक बल में बढ़ोतरी होती है।
प्रायः सामान्य श्वसन में हम केवल 500 मिली लीटर(प्रवाही आयतन) ही ऑक्सीजन ले पाते हैं जिससे फेफड़े का कुछ भाग अक्रिय और कुछ भाग सक्रिय रहता है, परन्तु जब हम नियंत्रित प्राणवायु(ऑक्सीजन) प्राणायाम के द्वारा दीर्घ श्वसन से फेफड़ों में लेते हैं उस समय हमारे फेफड़े में ऑक्सीजन (प्राणवायु) 3.5 से 4 लीटर भीतर जाती है, जिससे मनुष्य के सभी ट्रिलियन्स कोशिकाओं को ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति होती है, जिससे फेफड़े की सभी कुपिकाओं में ऑक्सीजन पहुंचने लगती है, और फेफड़े की सभी कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं, और सभी सम्यक रूप से कार्य करने लग जाती हैं फलस्वरूप शरीर निरोगता की ओर बढ़ता जाता है।

