रचनाकार

कहानी : बाजी पलट गई

(शब्द मसीहा केदारनाथ)

घर में बहुत चहल पहल देखकर हमने जोशी जी से पूछ ही लिया कि आज क्या कोई खास बात है ?

वे हँसते हुए बोले –“भाई साहब ! हमने भी सुना था कि उल्टी गंगा बहती है , लेकिन अब देख रहे हैं कि सच भी हो जाता है मुहावरा, अगर आप में थोड़ी सी काबिलियत हो।“

“क्या बात कर रहे हैं ? आपकी भाभी तो हमें बता रही थी कि आप बिल्कुल नाकाबिल आदमी हैं , फिर आप कब से काबिल हो गए ?” हमने भी आशंका जताते हुए पूछ लिया । भला कोई आदमी हम से ज्यादा खुश कैसे रह सकता है । अगर कोई नुस्खा है, तो हम भी खुश हो जाएँ उस नुस्खे को जानकर।

“हा हा हा …..आप भी अच्छा मज़ाक कर लेते हैं भाई साहब। लगता है आपकी भाभीजी से ठीक से पटती नहीं है , नहीं तो आपको भी सब पता होता कि आज क्या है।“ जोशी जी बोले।

“क्या पता होता ?” हमने पूछा।

“यही कि अब जमाना बदल गया है। भला हो इस कोरोना काल का।“ जोशी जी ने ठहाका लगाया।

“क्या मतलब ? जरा विस्तार से बताइये।“ हमने कोरोना काल का नाम आते ही पूछा। भला कोरोना कल में किसका भला हुआ है अडानी और अंबानी को छोडकर।

“भाई साहब ! कोरोना काल की वजह से ही ये सब संभव हुआ है। बिटिया सत्ताईस की हो गई थी अपनी । लड़के वालों के यहाँ माथा रगड़-रगड़ के परेशान हो गया था , मगर मजाल है कि लोग मान जाएँ । किसी को चार पहिया वाहन चाहिए था तो किसी को कुछ । श्वेता की नौकरी लगने के बाद उनकी मांग कुछ कम हो गई , मगर खत्म नहीं हुई थी । तीन लड़के पसंद आए थे …..पर हमारी बात सिरे नहीं चढ़ी ।“ जोशी जी बोले।

“अरे ! फिर तो बहुत-बहुत बधाई हो जोशी जी आपको, आपने तो किला फतह कर लिया। रिश्ता पक्का कर रहे हैं बिटिया का ।“ हमने कहा।

“जी नहीं, आज पाँच वरों का इंटरव्यू है।“ जोशी जी मुस्कुराते हुए बोले।

“क्या मतलब ? वरों का इंटरव्यू है? पाँच वरों का !” हमारा तो मुँह खुला का खुला रह गया इसे सुनकर।

“हाँ, भाई साहब! आपकी बिटिया आज सभी वरों का और सास-ससुर का इंटरव्यू लेगी ।“

“तो क्या बिटिया ने अपना कोई काम भी कर लिया है ?” हमने पूछा।

“आप समझे नहीं, बिटिया वरों से बात करेगी, और जो भी वर उसे सही लगेगा उसे ‘हाँ’ कहेगी । अब तो ये तय करना है कि लड़के के पास अपना क्या है, कितना को-ओपरेट करेगा, खाना बनाना, कपड़े धोना, इस्त्री करना आता है कि नहीं , कभी बच्चे खिलाये हैं या नहीं। पुरानी सोच का कोई विलुप्त अवगुण है या नहीं , कहीं हाथ उठाने जैसी मर्दानगी की बीमारी तो नहीं है आदि-आदि।“ जोशी जी ने मुस्कुराते हुए कहा।

“मतलब ये कि स्वयंवर हो रहा है ?” हमने प्रश्नवाचक दृष्टि से जोशी जी की आँखों में देखते हुए कहा।

“हा हा हा ….वर हैं, कोई राजकुमार थोड़े ही हैं । और वैसे भी अब उनके हाथ में जॉब नहीं है । आप कह सकते हैं कि दूल्हे डिस्काउंट पर मिल रहे हैं ….हा हा हा । ये इंतजाम तो मानवता के नाम पर किया है। महमाननवाजी हम भी जानते हैं। “ जोशी जी फिर से व्यंगरूपी हंसी बिखराते हुए बोले।

“तब तो बिटिया से कहना कि लिखवाकर ले, और अपनी सास का अंगूठा सहित साइन भी । लड़कियों को मज़ाक बना डाला है कुछ लोगों ने । शादी न हुई व्यापार हो हो गया । गुण मिलाते हैं , साहब गुण नहीं …..ब्लड ग्रुप मिलाईये, लड़के की सारी रिपोर्ट चेक कराईये। आजकल डमी भी बेच दी जाती हैं बाजार में सेल कहकर। और मुँह से कहे जुमलों का क्या भरोसा, लोग तो घोषणापत्र तक से मुकर जाते हैं। “ हमने कहा।

“हा हा हा ….पूरा प्रश्नपत्र तैयार है। सब ओब्जेक्टिव हैं , सिर्फ ‘हाँ’ और ‘न’ ही कहना है उम्मीदवार को, फिर क्विक आन्सर शीट से नंबर दिये जाएँगे। कुछ फिजिकल टेस्ट भी हैं जैसे सिलिन्डर उठाकर तीसरी मंजिल तक ले जाना, पानी की बोतल ले जाना। सब्जियों को रखने का टेस्ट भी है । पता नहीं कौन टमाटरों के ऊपर कद्दू रख दे । पति चुना जाना है, कोई फल थोड़े ही खरीद रहे हैं कि पसंद न आए तो वापिस कर दो।“ जोशी जी बोले और फिर अपने काम में व्यस्त हो गए।

हम तो हैरान होकर अपनी हँसी ही जैसे भूल गए थे । साला एक बेरोजगार वर की इत्ती इज्जत। कहाँ तो दूल्हों के भाव लाखों में थे, मगर भला हो सरकारी नीतियों का जिनके चलते दूल्हे अब डिस्काउंट पर हैं , इंटरव्यू दे रहे हैं भावी दुल्हन को , परफ़ोर्मेंस दे रहे हैं , शपथ पत्र साइन कर रहे हैं …..ये तो सचमुच कमाल हो गया । इस बेरोजगारी का बेटियों के बापों को तो जबर्दस्त फ़ायदा हुआ है। बेकार ही लोग सरकार को गालियां दे रहे हैं, धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं। हर बुराई के पीछे भी कोई भलाई जरूर होती है, इस बात से ऐसा ही लगता है। हमें तो लगता है कि कृषि बिल भी इतना बुरा नहीं है। मगर लोग समझते ही नहीं। जब बेटियाँ घोड़े पर जाएंगी, उसकी सखियाँ डांस करेंगी और दुल्हा सिमटकर सुहागरातवाले दिन कैसे बैठा होगा….हा हा हा । सच में रोमांच हो रहा है, इस उलटी बाजी से। अपने तो पुराने दिन बढ़िया थे ….पर नए भी कम मजेदार नहीं है। तमाशा देखते रहिए ….आँखें खोलकर।

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