रचनाकार

अगर इस तरह से ही होता रहा सब, तो सबकुछ ही मिटता हुआ दिख रहा है

( रमेश चन्द्र सेठ, आशिक जौनपुरी )

कहा जा रहा है यहाँपे बहुत कुछ।
मगर सत्य इससे अलग दिख रहा है।।
दशा देश की कुछ न पूछो कहूँ क्या,
फ़क़त मौत का साया ही दिख रहा है।
निराशा भरी आज हर शख़्स में है,
यहाँ अब न ईमा कहीं दिख रहा है।
ये कहती है सरकार सब ठीक ही है,
मगर काम कोई नहीं दिख रहा है।
धरातल पे कुछ है हक़ीक़त में कुछ है,
सिवा मौत के कुछ नहीं दिख रहा है।
तमाशा बना आज मानव यहाँपर,
सिवा रब के हमको न कुछ दिख रहा है।
अगर इस तरह से ही होता रहा सब,
तो सबकुछ ही मिटता हुआ दिख रहा है।

रमेश चन्द्र सेठ
नई सब्जी मंडी
पोस्ट चौकियाँ
जनपद जौनपुर
मो0 नम्बर 9451717162

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