कल्पनाथ राय बनने का सपना देखने वालों, कभी हकीकत में उन्हें लाया भी करो,

( आनन्द कुमार )
महत्वाकांक्षा : विधायक, सांसद बनना
राजनीतिक भूमि : लोकसभा घोसी व विधानसभा मऊ सदर, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना व घोसी
राजनैतिक दल : भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा वगैरह वगैरह।
अपेक्षा : सत्ता की चाह
आदर्श पुरूष जिनके पदचिन्हों पर चलना चाहते हैं : पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. कल्पनाथ राय।
जी हम बात कर रहे हैं मऊ जनपद के घोसी लोकसभा से लेकर विधानसभा सदर, मधुबन, घोसी व मुहम्मदाबाद गोहना के राजनैतिक गलियारे की। विकास की इस उपजाऊ भूमि को ना जाने किसकी नजर लग गई है कि दिन प्रतिदिन यह बंजर होती जा रही है। वैसे तो मऊ के वाशिंदे दो दशक पूर्व मऊ को सिंगापुर बनते देखने का सपना देख चूके थे लेकिन सपने का तारा ऐसे टूटा कि सिंगापुर बनना तो दूर जनपद के अस्तित्व में मिली खुबसूरती ही दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। इसका जिम्मेदार किसे कहें यह भी कह पाना मुश्किल है क्योंकि जनता ने समय-समय पर अपना जनप्रतिनिधि बदल तो दिया लेकिन विकास का ठप पड़ा ठहराव जस का तस है। खैर हम अभी किसी चुनाव की बात नहीं करेंगे न ही सांसद, विधायक आगे कौन किस दल का होगा उसका भी बात नहीं करेंगे। बात करेंगे तो सिर्फ और सिर्फ कल्पनाथ राय की जिनकी बदौलत हमें जिला स्तरीय वो तमाम सुविधाएं मिली हैं जो हमारे पुरखों ने कुछ वर्ष पहले देखी या देख ही नहीं पाए। बात कल्पनाथ राय के विकास की भी नहीं करेंगे और ना ही ठप पड़े विकास की करेंगे। यह बात तो राजनीति के चुनावी जंग में भी कर लेंगे, जो बात हमें करनी है वह बात है मऊ के विकास पुरुष पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. कल्पनाथ राय की पुण्यतिथि व जयंती की। क्या कुछ मुठ्ठी भर लोगों को छोड़कर जनपद के अधिकारी, नेता, जनप्रतिनिधि, व्यापारी नेता, सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोग इतने नकारे हैं कि वे एक अदद फूल भी जनपद के इस रचनाकार की पुण्यतिथि व जयंती पर नहीं चढ़ा सकते हैं।

कहने में मुझे न जरा सा संकोच है न बिल्कुल शर्म है, लेकिन दो टूक कहना चाहता हूं चाहे वे जिस दल के बड़े नेता जी हों, उनका सरोकार भाजपा से हो या कांग्रेस से, उनकी आत्मा सपा में बसती हो या बसपा में चाहे वे जिस दल से अपना राफ्ता रखते हों। क्या वे इस लायक नहीं हैं कि वे महान व्यक्ति के जयंती व पुण्यतिथि वर्ष में दो बार सम्भव हो तो मऊ के स्थापना दिवस पर कोई कार्यक्रम कर सके। अपनी संवेदना में कुछ फूल की पंखुड़ियां अर्पित कर सके। टिकट मांगने से लेकर पाने तक, पाने के बाद जनता से चुने जाने तक, सब तो अपना आदर्श विकास पुरुष कल्पनाथ राय को ही बताते हैं फिर ऐसे अवसरों पर भूल क्यों जाते हैं। सबसे आसान व सरल तरीका सोशल मीडिया पर फोटो लगाकर श्रद्धांजलि अर्पित करने का तरीका सोशल मीडिया का प्लेटफार्म है लेकिन बहुतेरे तो ऐसे हैं कि मैथलीशरण गुप्त से लेकर विश्व बाद्य दिवस पर फोटू चिपकाना पसंद करते हैं लेकिन उन्हें मऊ के सृजनकार कल्पनाथ की याद नहीं आती। नेता तो नेता सरकारी अमले के अधिकारी भी इस परम्परा का निर्वहन करते नजर नहीं आते। स्व. कल्पनाथ राय के परिजन डा. सुधा राय, डा. सीता राय, बेटी चन्द्रलेखा राय सहित कुछ लोगों की जिम्मेदारी नहीं है कल्पनाथ राय के प्रति संवेदना के दो फूल, यह सबकी जिम्मेदारी है लेकिन जैसे जैसे स्व. कल्पनाथ राय की जयंती व पुण्यतिथि का वर्ष बढ़ता जा रहा है तैसे-तैसे मऊ के अवाम, नेता व अधिकारी अपने दायित्वों के निर्वहन से पीछे हटते जा रहे हैं जो उचित नही है।

वह लोग जिन्होंने सोशल मीडिया पर दो शब्द लिखना भी उचित न समझा…
जेल में बंद सासंद अतुल राय का सोशल मीडिया चला रही टीम ने भी उनके फेसबुक पेज पर विकास पुरूष स्व. कल्पनाथ राय के प्रति श्रद्धांजलि के दो शब्द लिखना उचित नहीं समझा। सासंद प्रतिनिधि गोपाल राय ने मऊ जिले के विकास पुरुष स्वर्गीय कल्पनाथ राय की पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन् करते हुए श्रद्धांजलि व्यक्त की है।
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान ने तो मऊ के शिल्पी कल्पनाथ राय के प्रति दो शब्द लिखना तो दूर अगस्त माह में अभी तक कुछ भी फेसबुक पर पोस्ट ही नहीं किया है।
BJP MLC यशवंत सिंह ने भी विकास पुरुष के प्रति दो शब्द लिखना जरूरी नहीं समझा।
घोसी विधायक विजय राजभर 06 अगस्त को जनता दर्शन तो जरूर किए लेकिन विकास पुरुष स्व. कल्पनाथ राय के मूर्ति व तस्वीर के दर्शन से दूर रहें। उनका फेसबुक पेज यही बयां कर रहा है।
पूर्व मंत्री व मुहम्मदाबाद के विधायक श्रीराम सोनकर भी मऊ के सृजनहार स्व. कल्पनाथ राय को याद करना मुनासिब नहीं समझे।
मऊ के सदर विधायक मोख्तार अंसारी की सोशल मीडिया देख रही टीम ने भी दो शब्द लिखना उचित नहीं समझा।
नगरपालिका के चेयरमैन तैय्यब पालकी का फेसबुक पेज भी कल्पनाथ राय के प्रति श्रद्धांजलि के दो शब्द से अछूता है।
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण गुप्ता ने भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर 06 अगस्त को अपना श्रद्धांजलि अर्पित किया है लेकिन विकास पुरुष स्व. कल्पनाथ राय को याद करना मुनासिब नहीं समझा।
समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष धर्म प्रकाश यादव 06 अगस्त को ही मऊ में सम्पन्न हुए प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन का खुब फोटो शेयर किया लेकिन उन्हें कल्पनाथ राय याद नहीं आएं।
पूर्व चेयरमैन व विकास पुरूष के पद चिन्हों पर चलने का दावां करने वाले अरशद जमाल ने 06 अगस्त को अपने घर पूर्व कैबिनेट मंत्री और प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मनोज पाण्डेय को बुलाकर आपकी बात चैनल से पत्रकारिता किया लेकिन वे भी विकास पुरूष को याद न कर सके।
बसपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार राजू ने भी अपने फेसबुक पेज पर कल्पनाथ राय के प्रति दो शब्द लिखना मुनासिब नहीं समझा।
पूर्व सांसद हरिनरायन राजभर राजनैतिक महत्वाकांक्षा के साथ समय-समय पर मऊ आना पसंद करते हैं लेकिन विकास पुरूष की जयंती पर आना तो दूर दो शब्द अपने सोशल मीडिया पर भी व्यक्त नहीं कर सके।
पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान बसपा से सपा, सपा से कांग्रेस में चले गये लेकिन स्व. कल्पनाथ राय के मूल पार्टी में भी जाकर उन्हें अपने स्मृति से दो शब्द व्यक्त कर न सके।
पूर्व विधायक घोसी सुधाकर सिंह ने भी मऊ के शिल्पी के प्रति सोशल मीडिया पर अपनी कोई अभिव्यक्ति नहीं दी है।
जिन्हें याद आएं कल्पनाथ…
एमएलसी एके शर्मा ने अपने ट्विटर पर कल्पनाथ राय को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
सपा नेता राजीव राय ने पोस्ट किया है…
सदियों में एक कल्पनाथ पैदा होते..
एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा!
मऊ को फिर से विकास की राह पर खड़ा किए वग़ैर हर श्रद्धांजलि अधूरी है !
नमन् विकास पुरुष को 🙏💐💐
अपने फेसबुक पेज पर ऐसे ऐसे महान विभुतियों को श्रद्धांजलि के दो शब्द लिखने वाले नेता अगर अपने ही आंगन में अपने जनपद के रचनाकार कल्पनाथ राय को श्रद्धांजलि के दो फूल न चढ़ा सके तो उनके पेज पर तरह तरह के विभूतियों के प्रति समर्पित शब्दों का मोल क्या होगा यह आसानी से सोचा जा सकता है। न कोई कार्यक्रम का आयोजन न उनके लगे मूर्तियों पर एक माला का समर्पण और न ही फेसबुक व ट्विटर के मायावी दुनिया में दो शब्द। आखिर मऊ के इस महान विभूति का इस तरह अनदेखी कर वे कैसे चैन से रहते होंगे। जब मऊ के सृजनहार के प्रति नेता व जनप्रतिनिधि ही मौन हैं तो उन अधिकारियों को क्या फिक्र जो सिर्फ और अपना नौकरी करते हैं।



