कविता संग्रह “मकीशा” के बाद शालिनी सिन्हा की नई किताब “मेधांश”
समाज की समझ, शब्दों पर पकड़, लिखने की भाषा शैली पर ज्ञान जिस व्यक्तित्व को होगा वे समाज को हर
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समाज की समझ, शब्दों पर पकड़, लिखने की भाषा शैली पर ज्ञान जिस व्यक्तित्व को होगा वे समाज को हर
Read More० “पंख फैलाओ और उड़ान हो जाओ, ऊंचे उठो और आसमान हो जाओ… सीवान। समाज के प्रति सोच हो और
Read Moreसीवान। नए ज़माने की उभरती हुई लेखिका शालिनी सिन्हा (लवली) की बहुप्रतीक्षित पुस्तक मकीशा ( नए ज़माने की कविता) का
Read More@शालिनी सिन्हा… आज हर तरफ एक समान नागरिक संहिता की चर्चा है। काश की एक देश एक शिक्षा की भी
Read More@ शालिनी सिन्हा… आज हमारा जीवन प्लास्टिकमय हो गया है। सुबह उठने से रात को सोने तक न जाने हम
Read More@शालिनी सिन्हा… गंगा नदी को देवताओं की नदी कहा जाता है। हर शुभ अवसर पर हिन्दुओं द्वारा गंगाजल का उपयोग
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