राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो में पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला का सकुशल समापन

■ युवा किसान एवं कृषि उद्यमी खेतों में जीवन लौटने के लिए सूक्ष्मजीव अनुकल्प एवं त्वरित कम्पोस्टिंग के तरीके अपनाएं

मऊ। जनपद के राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो में पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन दिनांक 4.9.2021 को किया गया जिसमें मऊ जनपद के १४ गाँव के कुल 20 प्रगतिशील किसानों एवं ग्रामीण युवा उद्यमियों ने सहभागिता की. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों एवं ग्रामीण युवाओं को खेतों की मिट्टी को जीवन्तता प्रदान करने और पूरे कृषि तंत्र में पोषक तत्वों का व्यवस्थापन करने वाले सूक्ष्मजीवों पर प्रायोगिक जानकारी दी गयी। साथ ही उन्हें कृषि अवशेषों के बेहतर प्रबंधन और उसे वेल्थ के रूप में उपयोगी बनाने हेतु कम्पोस्ट निर्माण का भी गहन प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कराया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे दिन प्रतिभागियों को उन किसानों एवं उद्यमी के यहाँ परिचायात्मक दौरा करवाया गया जहाँ डीबीटी बायोटेक किसान परियोजना के तहत कम्पोसिटंग इकाईओं की स्थापना हुई है एवं लाभार्थी को मिटटी एवं कृषि से जुड़े व्यवसाय में आर्थिक लाभ हुआ है. आजमगढ़ स्थित जय भारत नर्सरी के श्री बंश गोपाल ने विभिन्न अवशेषों से उत्पादित कम्पोस्ट के नर्सरी में प्रयोग के प्रतिक्षित लाभ दिखाए. पूर्व अन्वेषक डी बी टी बायोटेक किसान परियोजना डॉ डी. पी . सिंह जो की इस समय प्रधान वैज्ञानिक, भाoकृoअनुoपo- भारतीय सब्जी अनुसन्धान संस्थान, वाराणसी में कार्यरत हैं ने बायोफो‍‌र्टीफाइड कम्पोस्ट की उपयोगिता एवं आत्मनिर्भरता तथा आजीविका सुरक्षा हेतु सूक्ष्मजीव आधारित कम्पोस्ट का निर्माण एवं बिक्री पर गहन रूप से चर्चा की। उन्होंने सब्जियों की खेती में सूक्ष्मजीव आधारित अनुकल्पों के प्रयोग के तरीके एवं फायदे बताये।

पांचवे एवं अंतिम दिन ब्यूरो के प्रधान वैज्ञानिक डॉ पवन कुमार शर्मा ने मशरुम उत्पादन तकनीक के विभिन्न पहलू पर प्रकाश डाला. उन्होंने ने बताया कि किसान किस प्रकार कम्पोस्ट एवं जैविक पदार्थ इस्तेमाल कर के एपीडा एवं जैव प्रमाणीकरण संस्थानों से प्रमाण पत्र कृषि उत्पादों का जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त करके कृषि व्यवसाय में औरअधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं. श्री ज्योति प्रकाश सिंह ने किसानों को ब्यूरो की विभिन्न प्रोग्शालों का भ्रमण करवाया और वहां हो रहे प्रयोगों के बारे में जानकारी दी. भ्रम के दौरान ब्यूरो स्थित कल्चर कलेक्शन भी ले जाया गया जहाँ कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों के संग्रहण के विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी गयी।
समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित ब्यूरो के निदेशक डॉ अनिल कुमार सक्सेना ने युवाओं का आवाहन किया कि युवा उद्यमिता की ताकत से परिचित हों और संघर्ष एवं जोखिम लेने की क्षमता का अपने अन्दर विकास करें जिससे एक अच्छे उद्यमी के रूप में स्थापित हो सकें. उन्होंने इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वर्तमान में समय की मांग और युवाओं को प्रेरित करने का एक बेहतर माध्यम बताते हुए कहा कि मिट्टी का बेहतर प्रबंधन वास्तव में पूरे पर्यावरण और खुद के स्वास्थ्य का भी प्रबंधन है जिसे आत्मसात करने की आवश्यकता है।
परियोजना के प्रभारी डॉ. रेनू ने प्रशिक्षण के कार्यकलापों पर प्रकाश डाला और बताया कि कृषि अवशेषों को दो माह में पूर्ण रूप से कम्पोस्ट खाद में बदलने की प्र्ताक्रिया का लाभ लेकर किसान और ग्रामीण युवा अपना उद्यमिता विकास कर सकते हैं जिससे अतिरिक्त आय का सृजन हो सकता है. फोर्टीफाईड कम्पोस्ट अपने आप में पोषक तत्वों और सूक्ष्मजीवों का एक भण्डार सिद्ध हो सकता है जिसकी पैकिंग और विपणन के माध्यम से किसान अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। समापन सत्र का सञ्चालन करते हुए वैज्ञानिक श्री ज्योति प्रकाश सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला. वैज्ञानिक डॉ मागेश्वरन ने औपचारिक रूप से धन्यवाद ज्ञापन किया। समापन सत्र में प्रतिभागियों को सहभागिता हेतु प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और यादगार चिन्ह के रूप में ग्रुप फोटो फ्रेम प्रदान किया गया. साथ ही उन्हें कम्पोस्ट का पैकेट और अन्य जैविक इनोकुलेंट भी वितरित किये गए. कार्यक्रम में ब्यूरो के वैज्ञानिकों के अतिरिक्त अनुसन्धान कर्ता एवं अन्य कर्मचारिगणों ने भाग लिया।

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