खेल-खिलाड़ी

क्या हुआ अंकल सेमीफाइनल में हार गये तो क्या नेशनल खेलकर तो आएं हैं

Mau news Rakchita

( आनन्द कुमार )

मऊ। उड़ने दो उसे पंख फैलाकर, जलने दो उसे सूरज की तपिश में, जो जलेगी तो निखरेगी जरूर, जब नन्हे कदमों से उस मंजिल को पाने जज्बा रखती हो कोहिनूर। जी हां यह चन्द लाईन बिल्कुल ही फिट बैठ रहा है मऊ की बेटी रक्षिता राय पर। पूर्व ब्लाक प्रमुख व विकास पुरुष स्व. कल्पनाथ राय के सभी कार्यों के मुख्य कर्ताधर्ता रहे स्वर्गीय विजय नारायण राय की पोती और अपने सामाजिक सरोकारों से जनपद में अलग पहचान रखने वाली “गूंज एक गुहार” सेवा समिति की संचालिका पूजा राय की बिटिया रक्षिता राय ने उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में सब जूनियर नेशनल हाकी धुआंधार खेलकर वापस अपनी मिट्टी अपने शहर सेमीफाइनल हार कर मऊ लौटी तो न उसे हार का मलाल था और ना ही गम। बावजूद इसके 14 साल की बिटिया रक्षिता ने कहा कि वे खुश है की सेमीफाइनल खेल कर लौटी है, खेल में हारी जरूर है लेकिन उसका मनोबल और खेल के प्रति इच्छा शक्ति नहीं हारा है, वे हार कर जीतने का जुनून और संघर्ष को सीखी है। बात बात में कहती है क्या हुआ अंकल, फाइनल नहीं जीत पाए तो क्या इतनी कम उम्र में हाकी में नेशनल में सेलेक्ट होकर खेलकर चले आए, अगली बार फिर सेलेक्ट होंगे और जब लौटेंगे तो मुसकान के साथ जीत भी होगी और ट्रॉफी भी।
मऊ शहर के डॉ.भीमराव बाबासाहब अंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम महज 7 वर्ष की आयु से हॉकी खेलने की शुरुआत करने वाली रक्षिता का जोश व जुनून 14 वर्ष की उम्र में चेहरे पर जो झलक रही है वह साफ बताती है मऊ की बेटी नैशनल में देश में मऊ का जय-जय एक दिन जरूर कराएगी।
“अपनामऊ” टीम की तरफ से रक्षिता को इस जोश व जुनून पर ढेरो बधाई।

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