मऊ में मदरसा शिक्षकों को मतदाता सूची से बाहर करने पर शिक्षक संगठनों का विरोध, उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी
मऊ। गोरखपुर–फैज़ाबाद खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में मऊ जनपद के मदरसा शिक्षकों के नाम शामिल न किए जाने पर शिक्षक संगठनों में रोष व्याप्त है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर उ०प्र० माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कड़ा विरोध जताया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश द्वारा पत्रांक CEO 2-13/2-2025, दिनांक 12 सितम्बर 2025 के माध्यम से 06 खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों—
लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद एवं गोरखपुर–फैज़ाबाद—की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण का निर्देश दिया गया था।
इस आदेश में माध्यमिक विद्यालय, पालिटेक्निक, डिग्री कॉलेज, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, संस्कृत विद्यालय एवं माध्यमिक स्तर के मदरसा शिक्षकों को मतदाता बनने का स्पष्ट अधिकार प्रदान है।
मऊ में ही मदरसा शिक्षकों के फॉर्म रिजेक्ट?
शिक्षक संघ के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में शामिल 17 जिलों में से केवल मऊ ऐसा जनपद है जहां अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा मनमाने तरीके से मदरसा शिक्षकों के मतदाता फॉर्म रिजेक्ट कर दिए गए।
इसके चलते सैकड़ों योग्य मदरसा शिक्षक अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो गए हैं।
संगठन की चेतावनी — नाम न जुड़ने पर जाएंगे उच्च न्यायालय
संघ के प्रदेश महामंत्री एवं खण्ड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी राजीव यादव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी व मुख्य राजस्व अधिकारी से मुलाकात की।
राजीव यादव ने स्पष्ट कहा कि—
“यदि मदरसा शिक्षकों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए, तो संगठन उच्च न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने गैर–संवैधानिक तरीके से मदरसा शिक्षकों को मतदान के अधिकार से वंचित किया है।
कौन–कौन रहे उपस्थित?
- जयराम यादव (जिलाध्यक्ष)
- देवानन्द (जिला मंत्री)
- अशोक कुमार मौर्य (जिला प्रवक्ता)
- सुनील कुशवाहा
- अशोक पाण्डेय
आदि पदाधिकारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे।

