मऊ और अटल… भूख लगी थी, लेकिन पहले सभा की फिर किया भोजन
(विजय कुमार गुप्ता)
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद कर भाजपा के वरिष्ठ नेता ओंकार नाथ भावुक हो गए। कोपागंज के रहने वाले ओंकार नाथ ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी इमरजेंसी से पहले जनसंघ के सभा के सिलसिले में मऊ आये थे। तब अटल जी के साथ तत्कालीन मऊ के विधायक लल्लू बाबू, ओंकार नाथ गुप्ता और हरिहर प्रसाद गुप्ता के साथ सूत व्यवसायी जगदीश प्रसाद तुलस्यान भी थे। अटल जी दूर से आये थे उन्हें भूख लगी थी उनसे कहा गया पहले भोजन कर लीजिए फिर सभा की ओर चला जाये।

लेकिन जुनूनी अटलजी ने पहले सभा को संबोधित किया। वो सभा रात 12 बजे हुई थी। उस दिन को याद कर उनकी आंखें भर आई। ओंकार नाथ ने कहा–ये सूनापन अब कोई खत्म नहीं कर सकता। अटलजी के जैसा न कोई था, न कोई होगा । मुझे नहीं पता….अटलजी के बिना हिंदुस्तान कैसे अपने को परखेगा। ओंकार नाथ ने बताया कि अटलजी और वे पार्टी के विस्तार के लिए अथक प्रयास किया। उनके विचारों में गजब का गुरुत्वाकर्षण था। जो भी उनको सुनता था चुंबक की तरह खींचा चला आता था। अटल जी ने पूरी जिंदगी जिम्मेदारी और जरूरत को जिया। उनकी सादगी, और विनम्रता दिल जीत लेती थी वो अद्भुत व्यक्तित्व के धनी थे। उनका होना कार्यकर्ताओं के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था।

भारतीयन जता पार्टी के वरिष्ठ नेता हरिहर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि अटल जी जब आए थे तो वह नगर के सदर चौकी स्थित सूत व्यवसायी जगदीश प्रसाद तुल्स्यान के घर रुके थे अटल जी का मऊ में 2 दिन का प्रोग्राम था और वे तुलस्यान जी के घर 2 दिन विश्राम किए थे।

उनके घर पर ही मऊ के नगीना नाऊ को बुलवाकर उनका बाल कटवाया गया था तथा सेविंग करवाया गया था। श्री गुप्ता ने बताया कि अटल जी नाम के अनुरूप बिल्कुल अटल थे जो ठान लेते थे वह करते थे। उनके जैसा शख्सियत राजनीति के मैदान में मिलना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि हम लोगों को ऐसे महापुरुषों के साथ काम करने का क्षणिक अवसर मिला है यह जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य है।

उधर स्वर्गीय जगदीश प्रसाद तुल्स्यान के पुत्र विजय तुलस्यान ने बताया कि वह बहुत छोटे थे याद नहीं है उन लोगों को लेकिन बाबूजी अक्सर अटल जी की बात करते थे इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि उनके वाराणसी स्थित घर में इमरजेंसी के समय नानाजी देशमुख व बाला साहब देवरस रुके हुए थे।
ऐसे महापुरुष की अनेकों किवदंतियां देश के कोने कोने में फैली हुई हैं अगर इन्हें समेटा जाए तो अनेकों इतिहास लिखा जा सकता है।


नमन