रचनाकार

ना हिन्दू बने हैं,ना मुसलमान बने हैं

( अखिलानंद यादव )

ना हिन्दू बने हैं,ना मुसलमान बने हैं।
बदले की आग में, हम हैवान बनें हैं।।

नफ़रत नहीं निकाला,
कभी भी दिल से अपने।
मिट्टी पलिद हो गए,
भारत के सभी सपने।।

तन्हाइयों में तनहा,श्मशान बने हैं।
ना हिन्दू बने हैं,ना मुसलमान बने हैं।।

गीता कुरान भी कभी,
आपस में बैर रखते।
अनुयायी होकर हम क्यों?
आपस में लड़ते रहते।।

अपनों से दूर होकर,सुनसान बने हैं।
ना हिन्दू बने हैं,ना मुसलमान बने हैं।।

दीपावली में है अली,
रमजान में है राम।
खुदा खुद बा एक है,
अलग अलग है नाम।।

दंगाइयों के दिल के,मेहमान बने है।
ना हिन्दू बने हैं,ना मुसलमान बने हैं।।

अखिल भारत आजाद है,
आजाद भी नहीं।
अपना आंगन आबाद है,
आबाद भी नहीं।।

अपने खड़े विपक्ष में,शैतान बने हैं।
ना हिन्दू बने हैं,ना मुसलमान बने हैं।।

रचना – अखिलानंद यादव
जनपद – मऊ
मो- 9450461087

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