गौरव : चूल्हा चौका संभालते, एसडीएम बनी कल्पना
प्रयागराज। जिला सेवायोजन अधिकारी पद पर तैनात कल्पना, नौकरी के साथ-साथ चूल्हा चौका संभालते हुए एसडीएम बन गयी। उनके इस कामयाबी से पूरा परिवार एवं शुभचिंतक जहां गदगद हैै वहीं कल्पना ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ केे नारा को चरितार्थ करतेे हुए यह भी सिद्ध कर दिया है कि एक घर की कामकाजी बहू पढ़ लिख कर अफसर बनती है तो बात कुछ और होती है। जी हां ऐसा ही एक वाक्य हुआ है कल्पना मिश्रा के साथ।
मूल रूप से हाटा कुशीनगर की बहू के रूप में कल्पना मिश्रा का मऊ जनपद से भी संबंध है। नगर के शिक्षक ज्ञानेंद्र मिश्र जो पत्रकार भी हैं उनके घर पर रिश्तेदारी के नाते कल्पना का मऊ से गहरा संबंध है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए करने के बाद कल्पना ने शादी होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी बनने का जो सपना था उसे कभी भी छोड़ा नहीं। पति शिवेन्द्र मिश्रा अभी पिछले साल एपीओ की परीक्षा में सफल होकर इलाहाबाद अदालत में तैनात हैं। पिछले साल भी कल्पना ने पीसीएस परीक्षा पास कर लिया। अभी वह जिला सेवायोजन अधिकारी इलाहाबाद में काम कर रही थी। कल्पना का लक्ष्य है आईएएस बनकर देश की सेवा करना। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पति शिवेंद्र मिश्रा एवं अपने परिजनों को दिया है। जिन्होंने एक कामकाजी बहू होने के बाद भी उन्हें इस सेवा में काम करने के लिए आप उत्साहित किया। कल्पना की सफलता में समाज को एक संदेश दिया है कि बचाओ बेटी पढ़ाओ के साथ साथ सरकार को बहू को भी आगे बढ़ाओ का नारा देना चाहिए तभी जाकर महिलाओं का सशक्तिकरण संभव हो पाएगा।

