चर्चा में

कह रहे थे कि यूपी में 73 से 72 नहीं बल्कि 74 जीतेंगे! वाह जी वाह

वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त के फेसबुक वॉल से…

कह रहे थे कि यूपी में 73 से 72 नहीं बल्कि 74 जीतेंगे! वाह जी वाह! उम्मीदवार तो मिल नहीं रहे। ‘नचनियों बजनियों’ का सहारा लेना पड़ रहा है। मथुरा में तो धन्नो वाली बसंती यानी अपनी, हमारे जमाने की स्वप्न सुंदरी हेमा जी थी हीं, रामपुर में सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जयाप्रदा जी को उतारा गया (कर्टसी बाबू अमर सिंह) जिनके बारे में पांच-दस साल पहले तक भाजपाइयों के मुंह से तमाम तरह के सुभाषित झरते थे और अभी, अपनी बदजुबानी के लिए रिकार्ड होल्डर आजम मियां ने फिर कुछ बोला है। राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण गोरखपुर और आजमगढ़ में भोजपुरिया अंदाज में ठुमका लगाने वाले रवि शुकुल जी और निरहुआ यादव जी की उम्मीदवारी राजनीतिक चर्चा से ज्यादा हास परिहास का विषय बन रही है। गोरखपुर से आयातित सांसद निषाद जी को जूता प्रकरण के लिए मशहूर संतकबीर नगर भेजना पड़ रहा है और जूता प्रकरण के हीरो सांसद के पिता त्रिपाठी जी को देवरिया भेजा जा रहा है, मिसिर जी के समर्थकों का कोप ठंडा करने के लिए। भदोही की सेवा करके अघा गए पहलवान ‘मस्त’ जी को चंद्रशेखर जी के बलिया रवाना किया गया तो भदोही के लिए एक ठो बिंद जी ढूंढकर लाए गए। मां-बेटे यानी मेनका और वरुण गांधीजी (वही वरुण गांधी जी, जिनकी ताई सोनिया गांधी जी को जरसी गाय और कांग्रेस की विधवा आदि न जाने क्या क्या , उन्हीं वरुण जी की पार्टी के साहेब कहते रहते हैं) को उधर से इधर और इधर से उधर यानी पीलीभीत से सुल्तापुर और सुल्तापुर से पीलीभीत करना पड़ रहा है! अंबेडकर नगर में सांसद पांडेय जी टिकट कटने के लिए बंसल जी पर गंभीर मगर घिनौने आरोप लगा रहे हैं-छि..। हमरे घोसी का उम्मीदवार अबहिं तक नहीं तय हो पा रहा! राजभर जी से सौदा पट ही नहीं रहा। गुस्साई के राजभर जी पूरे अवध और पूर्वांचल में तीन दर्जन से जादा उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। लेकिन राज्य सरकार में मंत्री भी बने हुए हैं। शायद सौदा पट ही जाय। ई सबके बावजूद, 74! कवनो शक!

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