मिसाल-ए-मऊ

मऊ के इंद्रपाल को मूर्तिकला के लिए 1.20 लाख रूपए का यंग आर्टिस्ट स्कालरशिप

@ आनन्द कुमार…

मऊ। हाथ, मिट्टी और मन का जुनून अगर यह तीनो मिल जाए तो किसी भी मिट्टी में जान डाल सकते हैं। उसे कोई भी रूप दे सकते हैं। अपने इसी जुनून के बदौलत मऊ जनपद के एक छोटे से गांव में पला, बढ़ा और अपनी मंजिल की ओर चल पड़ा एक ऐसा होनहार, जिसने अपना लक्ष्य ही अपने हाथ को हमेशा मिट्टी में सानने का बनाया और बढ़ता गया तो बढ़ता ही रहा। उसके उसी जुनून ने उसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा मूर्तिकला के लिए यंग आर्टिस्ट्स स्कालरशिप से नवाजे जाने की खबर मिली तो इसे सुनकर न सिर्फ इंद्रपाल और उसके परिजन ही गदगद हैं। जबकि पूरा मऊ उस होनहार बिरवान के इस मुकाम पर खुश है और उसे बधाई दे रहा है। मऊ जनपद के कोपागंज ब्लाक अंतर्गत फिरोजपुर गांव के रहने वाले खेती का कार्य व पान की दुकान करने वाले लालचंद राव व श्रीमती चनामुनी देवी के पुत्र इंद्रपाल, बचपन से ही गांव में मिट्टी से खेलते आए हैं।

इंद्रपाल

बचपन मे अपने पिता लालचंद एवं चाचा रमाकांत के पेंटिंग कला (कार्य) को देख कर कुछ अलग करने की चाह रखने वाले इन्द्रपाल बाल्यावस्था में ही अपनी आदत पर परिजनों से डांट खाते रहें। लेकिन वे इस डांट की परवाह न कर मिट्टी से खेलते रहे। और उन्होंने मिट्टी के खेल को ऐसा जुनून सवार हुआ की उसे ही अपनी पढ़ाई और उसे ही अपनी मंजिल मान उस ओर बढ़ते गए। प्राथमिक शिक्षा दीक्षा कोपागंज के कनियारीपुर से करने के बाद हाईस्कूल और इंटर उन्होंने सत्यराम जनता इंटर कॉलेज कल्याणपुर, घोसी से किया। उसके बाद इंद्रपाल ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से बैचलर आफ फाइन आर्ट ( दृश्य कला ) की डिग्री ली उसके बाद उन्होंने जामिया विश्वविद्यालय ( नई दिल्ली ) से मूर्ति कला में मास्टर डिग्री ली और मूर्तिकला को अपने जीवन का मंजिल मान उस ओर बढ़ते रहें। उन्होंने विगत दिनों भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा मूर्तिकला के लिए यंग आर्टिस्ट्स स्कालरशिप के लिए आवेदन किया था‌। इन्द्रपाल को स्कालरशिप में चयन होने की जैसे ही सूचना मिली वे खुशी से झूम उठे। बतौर स्कालरशिप इंद्रपाल को ₹120000 के साथ प्रशस्ति पत्र भी मिलेगा। इंद्रपाल ने बताया कि कोई भी मंजिल पाने में कठिनाई हो नहीं होती है बस उसको पाने के लिए व्यक्ति मेहनत ईमानदारी से करें और लक्ष्य अटूट हो। उन्होंने छात्र छात्राओं से कहा कि कला में कई विधाएं हैं उन्हें अपने के रूचि के हिसाब से अपनाना चाहिए। इस सफलता पर बधाई देने वालों में रमाकांत पेंटर, राजकुमार मास्टर, जोगेंद्र , उदय राज, अधिवक्ता प्रवीन, सोनू कुमार, अरविंद मास्टर, सुनील कुमार, अभिनव रंजन आदि शामिल रहे।

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