रचनाकार

मेरा मन करेगा तो प्रेम पर लिखुंगी…मन किया तो संविधान पर कटाक्ष लिखुंगी

मैं लिखुंगी

मेरा मन करेगा तो प्रेम पर लिखुंगी
मन किया तो संविधान पर कटाक्ष लिखुंगी
लिखुंगी मैं महिलाओं के सशक्तीकरण पर
लेकिन महिलाओं के साथ हुआ हर अन्याय और अत्याचार भी लिखुगीं

तुम बताओंगे सिर्फ विदेशीयों को दुराचारी और अत्याचारी
पर मैं हिंदुओ द्वारा हिन्दूओ पर किया गया हर अत्याचार अछूतपन भी कहूँगी

औरत होती है पूज्यनीय कहने वालों के घर मे ही
दलित औरतों संग हुआ है शोषण…यह भी कहूँगी

तुम कृष्ण और राम को प्रेमका प्रतिक बना कर पुजोगे मंदिरो मे …अहंकार का दम भरोगे
पर मैं तो लोगो द्वारा किये गये ऑनर किलिंग का आँकड़ा भी लिखुंगी

तुम चाहोगे मैं माँ सीता, और लक्ष्मीबाई की सिर्फ महान गाथा लिखूँ
पर मैं तो तुम्हरे गाँव,शहर, मोहल्ले मे
हिंसा का शिकार हुईं महिलाओं का भी सच भी लिखुंगी

तुम मुझ पर अपने -अपने दिखावटी संस्कारो के शब्द बाण से कोशिस जारी रखना

पर मैं तुम्हरे दोहरेपन का सच ही लिखुंगी

लिखुंगी तो वही जो लगेगाअन्तर्मन को सही

रंजना यादव
बलिया

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