प्रतिरोध की आवाज थेे जॉर्ज, जहाँ-जहाँ अन्याय एवं कुव्यवस्था देखते थे, विरोध में उतर जाते थे : शिवकुमार
नई दिल्ली। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास द्वारा प्रखर समाजवादी एवं क्रांतिकारी समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस की जयंती 03 जून के अवसर पर ‘‘संघर्ष के पर्याय जॉर्ज’’ विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय परिचर्चा में बोलते हुए जॉर्ज के खास सहयोगी रहे समाजवादी नेता शिव कुमार ने कहा कि ‘‘प्रतिरोध की आवाज थेे जॉर्ज’’, जहाँ-जहाँ अन्याय एवं कुव्यवस्था देखते थे, वहाँ जॉर्ज विरोध में उतर जाते थे। उनका हर पल भारतीय समाज के उत्थान एवं स्वाभिमान की रक्षा में लगा रहा।

विश्व भारती विश्वविद्यालय के अध्यापक प्रो0 सुभाषचन्द्र राय ने कहा कि जॉर्ज सर्वहारा के नेता थे, उनका पूरा जीवन अन्याय के खिलाफ लड़ने की लंबी कहानी है, जिन्हें पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी में ऊर्जा का संचार हो सकें और रचनात्मक समाज बन सके।
रायपुर, छत्तीसगढ़ के समाजवादी चिंतक एवं सुप्रसिद्ध कवि गिरीश पंकज ने कहा कि जॉर्ज संघर्ष के पर्याय और गरीबों के रहनुमा थे। समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति सुखी एवं सम्मान से जीवन जिये, उनका एक मात्र लक्ष्य था। अन्याय का प्रतिकार, आन्दोलन, धरना, प्रदर्शन एवं आमरण अनशन के द्वारा विरोध करने की प्रवृत्ति को लोगों में जिंदा रखते थे, जिससे सरकार निरंकुश नहीं हो। गिरीश पंकज ने कहा कि वे साहस एवं पुरूषार्थ के जीता-जागता उदाहरण थे।
सुप्रसिद्ध कवि और अध्यापक प्रो0 विजय राय रतन सिंह ने कहा कि जॉर्ज फर्नांडिस के पूरे जीवन पर आधारित भारत सरकार को फिल्म का निर्माण करना चाहिए कि जिससे भारतीय समाज में अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध करने की प्रवृत्ति जाग सकें। जॉर्ज संघर्षशील समाज का आदर्श हैं, जॉर्ज सदगुणों की खान थे।
विश्व हिंदी परिषद् के महासचिव विपीन कुमार ने कहा कि जॉर्ज से मिलने में सच से साक्षात्कार जैसा लगता था। जॉर्ज हमेशा गतिशील रहने वाले राजनेता थे, उनका स्पष्ट विचार एवं शाश्वत चिंतन सबसे अलग करता था। वे मौलिक सोच के साथ सबसे संवाद करते थे। उनका कहना था कि संसद ही हमारा मंदिर है, जहाँ से गरीबों, लाचार एवं विवश लोगों की समस्याएँ सुनी जाती है और समाधान होता है।
जॉर्ज के बेहद करीबी रहे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने कहा कि जॉर्ज भारतीय संविधान को सबसे श्रेष्ठ मानते थे और कहते थे कि यह सिर्फ कागज नहीं बल्कि भारतीय समाज का कायाकल्प करने वाला जिंदा दस्तावेज है। इसी संविधान की शपथ खाकर भारत के लोगों का सम्मान, स्वाभिमान की रक्षा करते हुए, जॉर्ज ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। इसी संविधान ने करोड़ो लोगों को जुबान और रोजगार दिया है। भारतीय संविधान समरसता एवं समता का अक्षय भण्डार है।
नीरज कुमार ने बताया कि उनके जीवन और संघर्ष पर आधारित प्रकाशित होने वाली किताब ‘‘प्रतिरोध की आवाज जॉर्ज’’ का कार्य प्रगति पर है। ‘‘प्रतिरोध की आवाज जॉर्ज’’ मेें गरीबों की आह, कराह और आवाज सुनाई पड़ेगी, वहीं संघर्ष एवं विद्रोह भी पढ़ने को मिलेगा।
इस ऑनलाइन राष्ट्रीय परिचर्चा का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए रामविलास ने कहा कि जॉर्ज फर्नांडिस नालंदा का सांसद रहकर हम नालंदा वासिये का मान सम्मान बढ़ाया। जॉर्ज अन्तर्राष्ट्रीय व्यक्ति थे।
नीरज कुमार
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