हमारे गौरव : वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त बने भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य
◆ पूर्वी उत्तर प्रदेश और खासतौर से मऊ, आजमगढ़ व बलिया के लिए गर्व की बात
मऊ। भारत सरकार के मान्यता प्राप्त पत्रकारों के संगठन, प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष, जनपद के शहीदी धरती मधुबन के निवासी व देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त को भारतीय प्रेस परिषद का सदस्य चुना गया है। उनके इस उपलब्धि पर पूरे देश सहित मऊ जनपद के पत्रकारों व शुभचिंतकों में हर्ष व्याप्त है। लोगों ने फोन, वाट्सअप, एसएमएस व सोशल मीडिया के माध्यम से श्री गुप्त को बधाई दिया है।

जयशंकर गुप्त का जन्म पूर्वी उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ वर्तमान में मऊ जनपद के ग्राम कठघराशंकर, थाना मधुबन के निवासी हैं। उनके पिता स्व.विष्णुदेव, स्वतंत्रता संग्राम एवं समाजवादी आंदोलन के अथक सेनानी के साथ-साथ पूर्व विधायक भी रहे हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही सरकारी प्राइमरी पाठशाला और फिर स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1942 में मधुबन थाने पर तिरंगा फहराने के प्रयास में अंग्रेज पुलिस की गोलियों से शहीद स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में बने शहीद इंटर कालेज में, किशोरावस्था से ही गांधी, लोहिया और जयप्रकाश के विचारों से प्रभावित होकर समाजवादी युवजन सभा और फिर युवा जनता की राजनीति में सक्रिय, कला स्नातक की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध ईविंग क्रिश्चियन कालेज में दाखिला, आपातकाल के दौरान स्नातक की पढ़ाई का अधिकतर समय आजमगढ़ की जेल में तथा जेल से बाहर आकर भूमिगत आंदोलन में बीता। आपातकाल के बाद बनी जनता पार्टी की सरकार से बहुत जल्दी मोहभंग होने के क्रम में अपनी ही सरकार के खिलाफ इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ मिलकर संघर्ष करते हुए जेल यात्रा भी किये। आगे के दिनों में सक्रिय राजनीति से संन्यास और सक्रिय पत्रकारिता की ओर झुकाव, विधि स्नातक की पढ़ाई के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबद्ध सीएमपी डिग्री कॉलेज में दाखिला, लेकिन परीक्षा में हुई नकल के चलते प्रथम वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण होने के बावजूद वकालत की पढ़ाई से मोहभंग, 1979 में काशी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता स्नातक की डिग्री ली और सक्रिय पत्रकारिता के मैदान में कूद पड़े, वाराणसी, इलाहाबाद, जयपुर, दिल्ली, मुंबई (तब बंबई), कोलकाता (तब कलकत्ता), पटना, वापस दिल्ली. दिल्ली से नागपुर और फिर वापस दिल्ली. तकरीबन 38 वर्षों की सक्रिय पत्रकारिता में अमृत प्रभात, राजस्थान पत्रिका, असली भारत, श्रीवर्षा, ब्लिट्ज, महाराष्ट्र मानस (महाराष्ट्र सरकार की मासिक पत्रिका जो अब बंद हो चुकी है), रविवार, नवभारत टाइम्स, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान में विभिन्न स्तरों पर नौकरी करने के बाद नागपुर में लोकमत समाचार के साथ कार्यकारी संपादक के बतौर जुड़े और फिर वापस आकर इसी पत्र के दिल्ली कार्यालय में वरिष्ठ ब्यूरो प्रमुख-कार्यकारी संपादक के रूप में सेवाएं देने के बाद फिलहाल, देशबंधु के कार्यकारी संपादक सह नेशनल ब्यूरो प्रमुख के पद पर कार्यरत विभिन्न टीवी चैनलों पर सम सामयिक राजनीतिक, सामाजिक विषयों पर विशेषज्ञ, विश्लेषक के रूप में प्रस्तुति, कभी-कभार पत्रकारिता के छात्रों को संबोधन-शिक्षण भी.हिंदी और अंग्रेजी के साथ ही देश की कई अन्य भाषाओँ के प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, पूर्व राष्ट्रपति डा एपीजे अब्दुल कलाम के साथ संयुक्त अरब अमीरात, सूडान और बुल्गारिया तथा रूस में मास्को, पीटर्सबर्ग, स्विट्जरलैंड, आइसलैंड और यूक्रेन जैसे देशों का भ्रमण. फिलीस्तीनी मुक्ति संघर्ष के क्रम में ‘ग्लोबल मार्च टू येरूशलम’ के बैनर तले ईरान, तुर्की और लेबनान की यात्रा।
इसके अलावा श्रीलंका, अमेरिका, चीन, थाईलैंड, म्यांमार और पड़ोसी नेपाल आदि देशों का भ्रमण. पत्रकारिता के मकसद से देश के भीतर प्रायः सभी राज्यों का सघन भ्रमण. संयुक्त राष्ट् के यूनिफेम आदि संगठनों के साथ मिलकर ह्यूमन ट्रैफिकिंग और जेंडर वायलेंस के खिलाफ सक्रिय रहे।
1990 के दशक में पत्रकारिता के क्षेत्र में बेहद प्रतिष्ठित जयदयाल, रामकृष्ण डालमिया सद्भावना पुरस्कार एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हिंदी अकादमी, दिल्ली के ‘साहित्यकार सम्मान’ पुरस्कार से सम्मानित, हिंदी अकादमी, दिल्ली के पूर्व सदस्य. भारत सरकार के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की संस्था प्रेस एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रेस इन्फार्मेशन ब्यूरो -पीआईबी- की केंद्रीय प्रेस मान्यता समिति के पूर्व सदस्य, इस समय राज्यसभा की मीडिया सलाहकार समिति का सदस्य।

