कोरोना के बाद अब एवियन इन्फ्लुएंजा से खतरा

हरियाणा के पंचकुला जिले की दो पोल्ट्री (मुर्गीपालन फार्म) से लिए गए नमूनों में एवियन इन्फ्लुएंजा के सकारात्मक होने की पुष्टि के बाद, राज्य सरकार ने 9 त्वरित कार्रवाई दलों को तैनात किया है और दोनों ही स्थानों पर नियंत्रण एवं निपटान अभियान चलाया जा रहा है। गुजरात के सूरत जिले तथा राजस्थान के सिरोही जिले में कौओं और अन्य जंगली पक्षियों के नमूनों में एवियन इन्फ्लुएंजा (एच5) की पुष्टि की गई है। इसके अलावा, कांगड़ा जिले (हिमाचल प्रदेश) से 86 कौओं तथा 2 एर्गेट्स (बगुलों) की असामान्य मौत होने की जानकारी प्राप्त मिली थी। जंगली पक्षियों की असामान्य मृत्यु के समाचार नाहन, बिलासपुर और मंडी (हिमाचल प्रदेश) से भी प्राप्त हुए है और उनके नमूने परीक्षण के लिए निर्दिष्ट प्रयोगशाला में भेजे गए हैं।

विभाग ने प्रभावित राज्यों के लिए सलाह जारी की है, ताकि इस बीमारी को और अधिक फैलने से रोका जा सके। अब तक सात राज्यों (केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश) द्वारा इस बीमारी की पुष्टि की जा चुकी है।

दिल्ली, महाराष्ट्र से प्राधिकृत प्रयोगशालाओं को भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। हालांकि छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के उन जंगली पक्षियों के किसी भी नमूने के सकारात्मक होने की पुष्टि नहीं हुई है, जिनका परीक्षण पहले किया गया था।

केरल राज्य के दोनों प्रभावित जिलों में नियंत्रण और निपटान कार्य पूरा हो गया है और केरल में पोस्ट ऑपरेशनल सर्विलांस प्रोग्राम से जुड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

देश के प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी के लिए गठित केंद्रीय दल प्रभावित स्थलों का दौरा कर रहे हैं। केंद्रीय टीमों में से एक दल 9 जनवरी, 2021 को केरल पहुंचा और यह टीम वर्तमान में इन सभी स्थानों की निगरानी कर रही है तथा महामारी से संबंधित वैज्ञानिक जांच की जा रही है। एक अन्य केंद्रीय दल 10 जनवरी, 2021 को हिमाचल प्रदेश पंहुचा और इसने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण कार्य किया।

राज्यों से जनता के बीच फ्लू के बारे में जागरूकता पैदा करने तथा एवियन इन्फ्लुएंजा के बारे में गलत जानकारी के प्रचार – प्रसार से बचने का भी अनुरोध किया गया है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा गया है कि, जल स्रोतों, ज़िंदा पक्षी बाजारों, चिड़ियाघरों और पोल्ट्री फार्म्स आदि के आस-पास निगरानी बढ़ा दी जाए, शवों का उचित निपटान करने तथा मुर्ग़ी पालन केंद्रों में जैव सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय किये जाएं।

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