कांग्रेस ने दिया घोसी से पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान को टिकट
■ घोसी से लोकल या बाहरी के मुद्दे पर आवाम के साथ, हमेशा रखी है ध्यान
(आनन्द कुमार)
मऊ। कांग्रेस ने शनिवार की रात जारी अपनी चौथी लिस्ट में उत्तर प्रदेश में 7 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित किया है। जिसमें 70-घोसी लोकसभा सीट से पूर्व सांसद व बसपा से निष्कासित नेता बालकृष्ण चौहान को टिकट देकर घोसी की राजनीति में नई सरगर्मी ला दी है। उधर बालकृष्ण चौहान को प्रत्याशी बनाए जाने से जहां उनके समर्थकों में काफी खुशी की लहर है वहीं मऊ में स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे में कांग्रेस ने अपना दांव खेल घोसी में उठ रहे इस मुद्दे पर जनता के साथ रहने की अपनी सहमति जताई है। वैसे घोसी लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने जब भी प्रत्याशी उतारा है तो वह घोसी लोकसभा का ही रहा है।
विकास पुरुष स्व. कल्पनाथ राय के निधन के बाद पहली बार बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 1999 में सांसद बने बालकृष्ण चौहान ने राजनीति में कदम रखा तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे बसपा की नीतियों में काशीराम और मायावती के प्रति अपनी आस्था व्यक्त कर काम करते रहे। लेकिन एक बार टिकट मिलने के बाद मायावती ने उन पर दोबारा दांव लगाना उचित नहीं समझा। ऐसे में वह हर लोकसभा में अपने लिए टिकट मांगते रहे। इधर पिछले 2014 लोकसभा चुनाव में वह बसपा से टिकट मांग रहे थे ना मिलने पर उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से संपर्क साधा और समाजवादी पार्टी के बैनर पर चुनाव लड़ने की अपनी आस्था व्यक्त की। उनका यह मुहिम भी काम आया उन्हें समाजवादी पार्टी से 2014 में उम्मीदवार बनाया गया। लेकिन टिकट की घोषणा के बाद ही उनके नाम को काटकर राजीव राय को प्रत्यासी बना कर उन्हें किनारे कर दिया गया। ऐसे में वे सपा छोड़ बसपा को लौट आए। 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट के लिए बहुजन समाज पार्टी में लगे थे लेकिन मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते उन्हें बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित कर दिया।
उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम कर अपने राजनीति की नई जुगत लगाई और कामयाब भी हुए कांग्रेस ने अपनी चौथी लिस्ट में उत्तर प्रदेश में 7 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी को घोषित की जिसमें बालकृष्ण चौहान को घोसी से बतौर प्रत्याशी घोषित किया गया। अब देखना होगा कि अपने राजनीतिक अंदाज में घोसी में बालकृष्ण चौहान क्या गुल खिलाते हैं। कांग्रेस पार्टी के लोग संगठन में आए नए नेता का स्वागत किस प्रकार से करते हैं। लेकिन इतना तो तय है कि बाल कृष्ण चौहान के प्रत्याशी बनने से सपा-बसपा गठबंधन व भाजपा-सुभासपा गठबंधन की राह आसान नहीं होगी। कहीं न कहीं बाल कृष्ण चौहान उनके लिए मुसीबत साबित हो सकते हैं।

