विधानसभा चुनाव 2022

अब्बास अंसारी! TRP का खेल पल दो पल का मेहमान है, चाहे आप बटोर रहे हो या मीडिया

@ आनन्द कुमार…

मऊ। सदर विधानसभा से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन से चुनाव लड़ रहे सदर विधायक, बाहुबली मोख्तार अंसारी के पुत्र इन दिनों अपनी हाजिर जवाबी को लेकर काफी चर्चा में हैं। अब्बास अंसारी उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को अगले 50 साल तक के लिए उखाड़ फेंकना चाहते हैं। वे पत्रकारों के सवाल पर कहते हैं कि बात मऊ के विकास व उत्थान की करिए। कहते हैं उलजुलूल सवाल करने से कोई फायदा नहीं है। वे मऊ सदर के विकास को लेकर चिंतित हैं। और जनता की बदौलत सदन में पहुंच मऊ की रहनुमा बन सदन में मऊ की आवाज को रखना चाहते हैं। अच्छी बात है युवा अब्बास अंसारी मऊ को लेकर इतने चिंतित हैं और विकास की बातें कर रहे हैं। लेकिन क्या वे 5 बार से लगातार विधायक चुने गए पिता मोख्तार अंसारी की जिस राजनैतिक विरासत को संभालने की कोशिश में लगे हैं, उनके कार्यकाल का कोई जवाब या लेखा-जोखा देंगे या कुछ कहेंगे। या मात्र विकास की हिमाकत भर जनता से सिर्फ वोट की जुगाड़ कर उसे गुमराह करेंगे और फिर अगली चुनाव की तैयारी में लग जाएंगे। अब्बास अंसारी क्या यह बता पाएंगे कि उनके पिता विधायक मोख्तार अंसारी के कार्यकाल में उनके पिता ने ऐसी कौन सी विकास की ईट रखी है जो मऊ के विकास में मजबूत साबित दिखाई दे रहा है। हां उनके पिता ने बिजली के क्षेत्र में छोटे-छोटे सभी स्टेशनों पर काफी विधायक निधि दी है, स्कूल, इण्टर कालेज, डीग्री कालेज का तो वे दिल खोल कर मदद किएं, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन फिर भी लगातार पांच बार के विधायक के कार्यकाल में मऊ में ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा जो वे विकास का दावा कर रहे हैं और विकास की बात कर रहे हैं। ऐसे में सिर्फ वे क्या केवल विधायक बनने के लिए या जनता का वोट बटोरने के लिए ऐसे दावे कर रहे हैं या फिर उनके अंदर विकास की ऐसी कोई ललक है? क्योंकि जिस पिता की बदौलत वह मऊ के राजनीति के क्षेत्र में विरासत संभालने जा रहे हैं यहां पर विकास की कोई ऐसी किरण दिखाई नहीं देती है। ऐसे में अब्बास का दावा कितना अच्छा है और कितना बुरा है यह एक-एक जनता जानती है। उन्होंने बुनकरों के पास बुक पर भी जमकर राजनीति करने की कोशिश की। लेकिन जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बुनकरों के पासबुक पर अपना तलवार चलाया तो ना मोख्तार अंसारी और ना ही अब्बास अंसारी ने इस विषय पर कोई अच्छी लड़ाई लड़ने की कोशिश की, अलबत्ता बुनकरों के पास बुक पर मऊ के नेताओं में कोई बोला तो समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल, वर्तमान चेयरमैन मोहम्मद तय्यब पालकी, सपा नेता अल्ताफ अंसारी, अबुबकर, जमाल अर्पण, इकबाल ऐसे तमाम नेता बुनकरों के पासबुक पर बोलते नजर आएं। अब्बास क्या यह बता पाएंगे कि पिछले इलेक्शन में ही जिस मोख्तार अंसारी ने मऊ के गरीब बुनकरों के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की बात कही थी और बाद में छोटे बच्चों के इंटर कॉलेज तक आते-आते बाद सिमट गई। उसकी इमारत का क्या हुआ उस स्कूल और कॉलेज का क्या हुआ जिसमें मऊ के गरीबों के बच्चे पढ़ने वाले थे ऐसे में केवल लंबी चौड़ी बातें कर कर मऊ के मतदाताओं को गुमराह भले कर लिया जाए लेकिन क्या विकास और मऊ के उत्थान की बात करने वाले अब्बास अंसारी मऊ का विकास कर पाएंगे, तो कैसे जब उनके पिताजी लगातार पांच बार से विधायक रह कर मऊ को कुछ ऐसा नहीं दे सके तो फिर आखिर इनसे कैसे उम्मीद की जाए।
अब्बास अंसारी पत्रकारों से कहते तो हैं कि विकास की बातें करिए। लेकिन आपसे जब सवाल पूछा जाता है तो आप स्वयं योगी और मोदी के नीचे बात नहीं कर पाते। आप यह भूल जाते हैं कि आप क्षेत्रीय विधायक पद के उम्मीदवार हैं और इस पद पर चुनाव लड़ते हुए आपको भी स्थानीय प्रत्याशियों, स्थानीय मुद्दों, स्थानीय समस्याओं की बात करनी चाहिए अगर मीडिया के लोग टीआरपी के लिए आपसे तरह-तरह के सवाल पूछते हैं तो कहीं न कहीं आप भी अपनी टीआरपी के लिए ऐसे ही बातों को रखते हैं जिससे आपका टीआरपी बढ़ जाए।
अब्बास अंसारी आपको भले ही मीडिया की बातें बुरी लगती हैं और मीडिया को आपकी बातें बुरी लगती हैं लेकिन यह टीआरपी का खेल पल दो पल का मेहमान है। चाहे आप बटोर रहे हो या मीडिया के लोग। लेकिन असल आवश्यकता की चीज तो जनता की मूलभूत सुविधाएं हैं। बुनकरों की समस्याएं हैं। किसानों की समस्याएं हैं। गरीबों, मजदूरों की समस्याएं हैं। व्यापारियों का दर्द है। जिससे सरोकार होता नहीं दिखाई देता। ऐसे में आपको पिता की विरासत भले ही आधी मिल गई हो बाकी तो 10 मार्च को पता चलेगा लेकिन जनता के अदालत का फैसला काफी गंभीर होता है। और आपको यकीन हो या न हो मऊ की जनता वर्षों से छली जा रही है।

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