चिल्ला मत …चिल कर चिल
ई ससुर के नाती विरोधी दल के लोग भी कैसे-कैसे फोटो डालते हैं , सच कहें तो कूटने को मन करता है . मगर भला हो गाँधी बाबा का जिनकी जीवनी हम बचपन में पढ़े थे और वो क्या कहते हैं गाँधी दर्शन प्रतियोगिता . उसमें एक ठो प्रमाणपत्र मिला था कि हम भी गाँधी बाबा के रजिस्टर्ड बन्दर हैं .
चूल्हे में जाय ये सोशल मीडिया जिसने हमारी सत्ताधारी पार्टी पर हमलों की बौछार कर दी है . कितना काम किया है , मगर लोग हैं कि अपना काम किये ही जा रहे हैं कह कह कर. पता नहीं घुट्टी में ही घोलकर पिला रखा है इस देश के लोगों को कि …कुछ तो लोग कहेंगे …लोगों का काम है कहना . सो बके जा रहे हैं . अपनी डफली अपना राग और सत्ताधारी सेवक कहते हैं उनसे …भाग मिल्खा भाग .
अब देखिये लोग गड्ढों के चित्र सोशल मीडिया में डाल रहे हैं . कोई-कोई तो ऐसा बाबला है कि गड्ढों में पौधे रोप रहा है और कोई -कोई तो उस से भी आगे है …कमल के फूल गड्ढों में चढ़कर पूजा कर रहे हैं . अरे! भाई पुरातत्व विभाग …अपनी कुम्भकर्णी नींद खोलो और ढूंढो कि सड़क कब बनी थी .
हमारे मोहल्ले का लड़का विकास भी जो कि चार साल पहले हमारे कंधे से नीचे था , अब हमारे सिर से ऊपर चला गया है . मगर ये सोशल मीडिया पर बैठे बेरोजगार ……कभी उसे देखने नहीं आये . भाई ! आई शपथ ….विकास है भी और बड़ा भी हो रहा है .
योजनाओं की ऐसी बारिश हुई थी कि चेरापूंजी भी शरमा जाय . रिकार्ड तोड़ आंकड़े थे साहब . कल ए बी पी वाले खरदूषण भैया ने हमारे सारे मजे पर पानी फेर दिया सच बताकार . बताओ एम्स में क्या उसे भर्ती होना है ? वो तो विदेश भी जा सकता है . कहता था योजनाओं के लिए रखा गया पैसा बीस परसेंट भी खर्च नहीं हुआ . बेकार में जलता है सत्ता से . अबे! सही दृष्टी कोण से देखना भी नहीं आता . चौकीदारी करके अस्सी परसेंट पैसे पर सरकार ने ब्याज कमाया है . देशभक्ति का सबूत दिया है . इसीलिए ऐसे झूठे चैनल के सिग्नल अक्सर गायब कर दिये जाते हैं और हमारे जैसे पार्टी विरोधी लोग आँख मलते रह जाते हैं मगर मजाल है कि कोई रिपोर्ट पूरी देख पायें .
किसान-किसान खेल रहे हैं . अबे! क्या करोगे खेती कर के ? हर साल घाटा खाते हो …फिर फाँसी खाते हो . अबे! जमीन बिल्डरों को बेचो और आराम से रहो . सेंसेक्स को देखो कैसे ऊपर जा रिया है . भाई विकास उधर ही बहता है जिधर गड्ढा होता है . और तुम आँखें बाहर निकाल रहे हो . किसान की किस्मत में सिर्फ़ नारे हैं …तो मिलकर बोलो …जय किसान .
युवाओं का कित्ता उपकार किया है . सस्ते मोबाइल, सस्ते डाटा पैक और रिलायंस कंपनी का जिओ. अब ससुर भारत संचार निगम और एम टी एन एल जायें भाड़ में …हमको तो विकास करना है . सरकारी कर्मचारी और कंपनियां तो एलियन हैं …सो इनको बेचते जाओ . समझ नहीं आता कि ये सरकार अपने प्यादों से हारती क्यों है ? लगता है मैच फिक्स है .
अब लोग बाढ़ को रो रहे हैं . भाई गलियों तक नदियाँ आ गई हैं . इनका तो स्वागत होना चाहिए . वैसे भी इंद्र देव किसी से रिश्वत तो खाते नहीं हैं . जहाँ दिल करता है वहीं बरसते हैं . इस बार रेगिस्तान को सौगात दिल खोल के दी है . मगर विपक्षी हैं कि जलभराव का रोना लिए बैठे हैं . अरे! भाई समुद्र ने दस्तक दी है , मुफ्त में टीन होने का मजा लो . ट्यूब के साथ तैरो , पोलोथिन की थैलियों में हवा भरकर तैरो …जीभर के तैरो …मुफ्त की सौगात है ….अब तैरने के दिन आए हैं .
इस देश के आदमी धार्मिकता को भूलते जा रहे हैं . कल दिखा रहे थे कि लोग नदियाँ और नाले तैर कर पार कर रहे हैं . अबे! भाई अगर सही से हनुमान जी का ख्याल किया होता तो उड़कर पार करते . धर्म का बंटाधार हो रहा है ये इस बात का सबूत है . लोगों को चाहिए कि हवन करें, यज्ञ करें, पाठ करें, जाप में ध्यान लगाएं और अपने अंदर उड़ने की शक्ति विकसित करें …ये विकास का दौर है . पुल-पुलियाओं का रोना छोडिये .
अब लोग अस्पतालों में हो रही मौतों पर हंगामा मचाते हैं . बेचारे निरीह डाक्टरों को पीटते हैं. सब भूल जाते हैं कि …होहिं है वही जो राम रची राखा. अरे! भाई ! चलो रामजी को आपने साम्प्रदायिक बना दिया तो भगवान कृष्ण को ही मानकर सुन लो कि …जो भी करते हैं वे ही करते हैं . बेकार में ही तुम लोग नारेबाजी और मोमबत्ती मार्च निकालकर माननीय सत्ता के नेताओं की नींद हराम करते हो . इतनी साफ़-सुथरी पुलिस को तंग करते हो जो कभी आपकी रिपोर्ट न लिखकर थाने में क्राइम का ग्राफ बढ़ने ही नहीं देती . द बेस्ट पुलिस .
बेकार में ही लोग निर्भया और दामिनी को हिरोईन बना रहे हैं . अरे! भाई वो हिट फिल्म का गाना नहीं सुना था …हम बने…तुम बने इक दूजे के लिए . अब गुंडे और उजड्ड लोगों की तो माँ-बहिन होती हैं सो उन्हें तो कोई छेड़ नहीं सकता . तुम ठहरे शरीफ आदमी …अगर किसी की इज्जत लुट रही हो तो तुम वीडियो बनाकर तुरंत फॉरवर्ड करोगे पर बचाने का काम तो पुलिस का है. शरीफ घरों की औरतें तो होती ही छेड़ने के लिए हैं क्योंकि उनके घर के लोग शरीफ होते हैं और इतने शरीफ होते हैं कि रेप हो जाने पर भी बेटी को ही कहेंगे कि तूने हमारी नाक कटवा दी . चुप रह …या फिर जहर खा ले …हमें बदनाम न करवा …हम तो खानदानी शरीफ हैं .
जब देखो तब शायरी भी लिखेंगे तो लड़कियों पर ….तू होती तो ऐसा होता …तू होती तो वैसा होता . मगर औरत तो अपनी शर्म ओढ़े हुए है . क्या कहा ? सबूत चाहिए ! अबे ! अक्ल के अन्धो …कभी देखा है तुम्हारे लिए कोई शायरी लिखते हुए किसी लडकी को ? एक तरफ़ा प्यार है तुम्हारा …ज्यादा मत उड़ो , अपनी चौड़ी छाती पर . लड़कियाँ कहाँ आहें भरतीं हैं तुम्हारे लिए और एक तुम हो कि फेंफड़ों पर जोर डाले जा रहे हो …आहें …भर…भर के .
यहाँ जो भी होता है विधि द्वारा लिखा हुआ है अतः शान्ति से सहो . कोई एक गाय मारे तुम दो आदमी मार दो मगर गौशाला में छत्तीस गाय मर जायें तो मुँह पर बेलाडोना टेप लगाकर बैठो और पिंक रिव्योलुशन का मजा लो .
भाई ! मैंने कल ही नया हेलमेट लिया है और आज टेस्टिंग का मूड है . देखता हूँ आपके दिल पत्थर के बने कितने मजबूत है और आँखों पर असली चश्में हैं टीन के .
चाय पी लो …शाम हो रही है . पढ़ने के बाद सोचना बिल्कुल मत …टैक्स लगता है न ….हा हा हा …नींद खुल जाय तो मुझे मत ढूँढना …मुझे भी चैन से सोना अच्छा लगता है मगर वो सोहेब इलियासी की आवाज अब भी डराती है ….चैन से सोना है तो जाग जाओ ! कतई बाबडी पूँछ था भाई …हा हा हा .
पढ़ने के बाद घुटनों पर जोर मत डालना …स्वदेशी बाबा के विदेशी मशीनों के तेल भी दिखावटी ज्यादा हैं …वो भी भावनाओं का मुनाफा कमा गया और सरकार विदेशों से चीनी मंगवा रही है , चीन से सामान खरीद रही है …स्वदेशी तो शायद अब कफ़न ही बचे हैं या तिरंगा झंडा .
शब्द मसीहा

