नीट परीक्षा पास कर शीबा ने दिवंगत मां-बाप को दी श्रद्धांजलि
(अशोक जायसवाल)
बिल्थरारोड/बलिया। जिसने अपनी मां को देखा ही नहीं, जिसे न तो मां का चेहरा याद है और ना ही मां के गोद की छांव और ना ही हाथ का झूला। याद भी कैसे होगा, जब मां महज दो साल के उम्र में ही अपनी बेटी को तन्हा पालने में अन्य बच्चों सहित छोड़ भगवान को प्यारी हो जाए। क्या बीता होगा उस वक्त उस परिवार में जब यह दुखद घटना घटी होगी। भले ही वक्त और नियति के हिसाब से सब तय हैं पर ऐसा भी वक्त क्या जो किसी की दुनिया ही उजाड़ दे।
बलिया जनपद के बिल्थरारोड क्षेत्र के तुर्तीपार निवासी स्व0 देवेन्द्र सिंह व स्व0 लाखपति सिंह की पुत्री शीबा सिंह के साथ ऐसा ही हुआ था। जब वह न तो ठीक से चल पाती थी और ना ही बोल पाती थी तो 1998 उसकी मां ने महज दो वर्ष की उम्र में ही उसका व अन्य परिजनों का साथ छोड़ परलोक सिधार गयी। तो वर्ष 2006 में बैंक में कार्यरत उसके पिता ने भी उसका साथ छोड़ दिया। अपने मां-बाप को खो देने वाली शीबा की देखरेख उसके बड़े भाईयों अजय सिंह, अम्बरिश, अभय व प्रशांत के जिम्मे आ पड़ी। अजय सहित सभी भाईयों ने अपनी बहन को पढ़ने व परीक्षा की तैयारियों में कोई कमी नही होने दी।
बेटी शीबा मां की यादों को संजोए उसकी तस्वीर देख कर शनै-शनै बड़ी होती रही। उसने तो सिर्फ घर में अपनों से बात-बात में चर्चा में यही सुन रखा था कि मां उसके जन्म के बाद उसे पाकर इतना खुश थी कि क्या कहना। साथ ही जब अपनी गुड़िया रानी को प्रेम के छांव में दुलारती थी तो बात-बात में यही कहती मेरी बेटी डाक्टर बनेगी, खूब बड़ा डाक्टर।
लेकिन ईश्वर को तो कुछ और मंजूर था शीबा सिंह को दो साल की उम्र में मां छोड़कर परलोक सिधार गयी। जब मात्र 10 वर्ष की थी तो पिता।
ऐसे में घर आंगन में गूंजते शब्दों के बीच बेटी शीबा ने मां के सपने को पूरा करने की ओर कदमताल तो बड़ा दिया पर पर अफसोस कर जाती की काश मां जिन्दा होती।
शीबा सिंह नीट की प्रवेश परीक्षा में पूरे देश में 5560 वां रैंक लाकर जिले व क्षेत्र का नाम रोशन तो किया ही है। मां का सपना की बेटी चिकित्सक बने इस ओर भी कदम बढ़ा कर सच्ची श्रद्धांजलि भी दी है। बलिया के ज्ञानकुंज विद्यालय से हाईस्कूल व वाराणसी के इम्पीरियल पब्लिक स्कूल से प्रथम श्रेणी से इंटरमीडिएट पास है। वे चार भाईयों में सबसे छोटी है।
1998 में जब शीबा सिर्फ 2 वर्ष की थी तभी उसकी मां स्व0 लाखपति सिंह उसे छोड़कर देवलोक को चली गयीं। शीबा के भाई अजय सिंह के अनुसार जब वह पैदा हुई तो उसकी मां का सपना था कि मेरी बेटी डाक्टर बने। बचपन में ही अपनी मां को खो देने वाली शीबा शुरू से ही पढ़ने में काफी तेज थी। जब वह कक्षा दो में पहुंची तो उसका दाखिला बंशीबाजार स्थित ज्ञानकुंज एकेडमी में कराया गया। वहां सें प्रथम श्रेणी से हाईस्कूल पास करने के बाद वह वाराणसी स्थित इम्पीरियल पब्लिक स्कूल में पढ़ने लगी। भाईयों द्वारा अपनी मां की इच्छा जानकर उसने बाइलॉजी विषय से अपनी पढ़ाई जारी रखी।
आखिर शीबा की मेहनत रंग लाई व उसने नीट की की परीक्षा में पूरे भारत वर्ष में 5560 वां अंक लाकर अपने मां का डाक्टर बनने का सपना पूरा कर दिया। क्षेत्र की बेटी की इस सफलता से लोगों में खुशी की लहर है।
शीबा सिंह को आज इस सफलता पर गर्व है। भावुक शब्दों में कहती है काश मम्मी-पापा होते। शीबा ने कहा कि बड़े भाइयों व परिजनों ने जो साहस व जुनून दिया उसी की बदौलत सब सम्भव हुआ है।


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