लद्युकथा : अपनी बेटी की परवाह थी
कोर्ट के बाहर आज मीडिया की जबर भीड़ थी . आज नेता जी रेप केस पर फैसला होना था . सभी लोग उत्सुक थे कि न्याय का चाबुक चलता है या नहीं इनकी मोटी खाल पर .
पुलिस की कस्टडी में नेता जी को लाया जाना था . जेल से बाहर निकलते हुए नेता ने अंगड़ाई ली . बाहर बहुत प्यारी हवा चल रही थी . नेता इतराते हुए बोला –
“अरे! क्या देख रहे हो तुम ! आज तुम्हारा भी छुटकारा हो जाएगा और मेरा भी . फैसला हो चुका है .”
कमल गौतम को ये बात बहुत बुरी लगी . नेता ने एक गरीब लड़की से नशे में रेप किया था . उसे अहसास हो चला था कि अब आगे नौटंकी ही शेष बची है इस केस में .
नेता सीना चौड़ा करते हुए गाडी में घुसा और पसर गया . तीन जवान अन्दर बैठ गए . कमल गाड़ी में आगे बैठा था . गाडी सरपट दौड़ने लगी कोर्ट की तरफ . कमल के दिमाग में नौकरी के समय ली गई शपथ गूंजने लगी –
“मैं, कमल गौतम ईश्वर की शपथ लेता हूँ . सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूं कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा, मैं भारत की प्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूँगा अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंत:करण से निर्वहन करूँगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार कार्य करूँगा. ”
गाड़ी कोर्ट परिसर के अन्दर दाखिल हुई . नेता जी के ऊपर सभी कैमरे फोकस हो गए . लाइव दिखाया जा रहा था . गाडी का दरवाजा खोला गया तो नेता शान से बाहर निकला और हाथ हिलाकर अभिवादन करने लगा .
कमल ने अपनी पिस्तौल निकाली और नेता के सीने पर तानते हुए पूछा-
“तुमने संविधान की कसम खाई थी न . याद है कुछ . जरा दोहराओ उसे !”
नेता सकपका गया . उसे इस बात का अंदाज़ा नहीं था . वह पुलिसवाले पर झपटा . कमल पूरी तरह तैयार था इस सब के लिए . बूट की जोरदार ठोकर उसने नेता के चेहरे पर मारी और जैसे ही वह जमीन पर गिरा सारी गोलियां सीने में उतार दीं.
इस दृश्य को अन्दर बैठे लोग भी देख रहे थे . जज ने जैसे ही यह देखा वह कुर्सी छोड़ भाग लिया .
“अरे! तुम रक्षक हो . तुमने कानून अपने हाथ में क्यों लिया ?” एक मीडिया वाले ने हिम्मत कर पूछा .
“ये साला मुजरा देखने जा रहा था न्याय की देवी का , पर मुझे अपनी हर बेटी की परवाह थी .”
(लेखक केदार नाथ शब्द मसीहा दिल्ली रेलवे में इंजीनियर हैं)
