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प्रोत्साहन : सनबीम स्कूल मऊ ने होनहार छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित

मऊ। सनबीम स्कूल मऊ के प्रांगण में रविवार को ‘प्रोत्साहन‘ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय के प्रबन्धक गणों द्वारा माँ सरस्वती की पूजा एंव दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। तत्पश्चात् बच्चों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। नर्सरी के बच्चों द्वारा प्रस्तुत राजस्थानी लोक नृत्य ‘कालबेलिया‘ ने सभी का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणियों के छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। ‘प्रोत्साहन‘ में बच्चों को प्रथम श्रेणी, 100 प्रतिशत उपस्थिति आदि के पुरस्कार के साथ कुछ बच्चों को स्कालरशिप भी दी गई। वही अच्छे प्रदर्शन के लिये जनरल प्रोफिसीएंसी का पुरस्कार 30 बच्चों को दिया गया, जिसमें नवनीत कुमार, पुजा पाण्डेय,सत्यम पाण्डेय आदि को पुरस्कृत किया गया।

इसके अतिरिक्त लगातार चार वर्षों अथवा चार वर्षों से ज्यादा बार प्रथम श्रेणी प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ‘सुपर ल्युमनरीज़‘ का पुरस्कार दिया गया, जिसमें अद्वैत कार्तिक, आख्या अग्रवाल ,सागर चौबे समेत 24 विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। ‘ल्युमनरीज‘ पुरस्कार से सान्वी और शाम्भवीं को,‘ग्रैंण्ड मास्टर‘ पुरस्कार से दर्श पाण्डेय, राज प्रताप सिंह तथा श्रीयम पाण्डेय समेत 54 बच्चों को पुरस्कृत किया गया।

वहीं रैंक होल्डर्स और विभिन्न विषयों में सर्वश्रेष्ठ अंक प्राप्त करने वाले अरनव अग्रवाल ,जानशी सिंह ,आन्जनेय त्रिपाठी सहित 38 बच्चों को और विभिन्न एल. टी. ए. जैसे तबला, कथक, कराटे, फोटोग्राफी आदि में बेहतरीन प्रदर्शन के लिये एल.टी.ए. टॉपर्स पुरस्कार से क्रमशः मानस मनी त्रिपाठी, श्रीजी तिवारी, श्लोक खण्डेलवाल,समेत 49 छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधंक राकेश गर्ग नें विद्यार्थियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया और निरंतर परिश्रम करते रहने के लिये प्रेरित किया। उन्होने छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों के साथ अपना अनुभव बाँटा और कहा कि परसेंटेज क्राइटेरिया बढ़ाने के बाद भी बच्चों ने अच्छा प्रदर्शन किया। विद्यालय की प्रधानाचार्या पूनम तिवारी ने विद्यालय द्वारा किये जा रहे प्रयासों के बारे में बताते हुए कहा कि किसी भी विद्यालय और वहाँ के अभिभावकों की मेहनत बच्चों के प्रदर्शन से पता चलती है, उम्मीद है कि आगे भी छात्र ऐसे ही परिश्रम करते रहेगें और विद्यालय के अन्दर ही नहीं अपितु बाहर भी होने वाली परिक्षाओं में सफल होगें।­

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