चिंता : बिल्थरारोड में व्यवसाय की गिरती स्थिति से व्यापारी परेशान
(अशोक जायसवाल)
बिल्थरारोड, बलिया। स्थानीय बाजार की स्थिति दिनों दिन बिगड़ने से व्यवसायियों की चिन्तायें बढ़ने लगी हैं। कभी गुड़, खंडासरी व भरवा लाल मिर्च की मंडी के रूप में प्रसिद्ध यह बाजार आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। बाजार की इस स्थिति के लिए लोग ट्रेनों की समय-सारणी में बदलाव व इसकी लेट-लतीफी के साथ ही यहां किसी उद्योग के विकसित न होने को एक अहम कारण मानते हैं।
20 वीं सदी की शुरूआत में जब स्थानीय रेलवे की नींव पड़ी तब यह नगर एक जंगलके रूप में था। आज जहां बाजार है, वहां कभी सियार विचरण किया करते थे। तत्कालीन समय में सरयू नदी के तट पर बसा बिल्थरा बाजार गांव एक विकसित बाजार था। इस बाजार में बिकने वाले गल्ला, जूट के सामान, कपड़े व अन्य वस्तुयें बंगाल से पानी के जहाज द्वारा यहां पहुंचता था। सरयू नदी किनारे बसा तुर्तीपार गांव फूल व कांसे के बर्तन के निर्माण के रूप में प्रसिद्ध था। इसकी तुलना मुरादाबाद के बरतनों से की जाती थी। इसकी सप्लाई बंगाल व ढाका तक होती थी। बाद में यातायात के साधन में बदलाव होने पर जब पानी के जहाज के बदले मालगाड़ियों से माल ढुलाई का कार्य प्रारम्भ हुआ तब लोगों का बिल्थरारोड आकर बसना प्रारम्भ हुआ। धीरे-धीरे बेल्थरा बाजार उजड़ कर बिल्थरारोड में समाहित हो गया। गुड़, भरवा लाल मिर्च व खंडसारी के लिए यहां अपने जिले के अलावा मउ, देवरिया जिले के व्यापारी आकर इसकी खरीद फरोख्त करते थे। समय बदलने के साथ इन वस्तुओं की खरीददारी पर भी असर पड़ा और आज इनका अभाव साफ झलकता है। इस सम्बन्ध में बातचीत करने पर व्यवसायी दिनेश जायसवाल कहते हैं कि आज बाजार उजड़ रहा है। कहा कि एक समय ऐसा भी था कि ग्राहकों को समान देने के लिए लोगों को फुर्सत तक नही मिलती थी। परन्तु वर्तमान में हालत यह है कि अब ग्राहकों को खोजना मजबूरी बन गयी है। कहा कि जब से यहां बड़ी रेलवे लाइन की ट्रेनो का आवागमन शुरू हुआ तथा सवारी गाड़ियों के समय में परिवर्तन हुआ तभी से व्यापार मंदा होना शुरू हो गया। व्यवसायी बैजनाथ प्रसाद साहू कहते हैं कि ट्रेनो के परिचालन व चट्टियों पर दुकानो के विकसित होने के चलते बाजार पर काफी असर पड़ा है। स्वर्ण व्यवसायी जय प्रकाश सर्राफ भी बाजार में गिरावट का मुख्य कारण सवारी गाड़ियों का समय से न चलने व क्षेत्र में उद्योग धंधों के विकसित न होने को मानते हैं। व्यवसायी मो0 इस्हाक भी इनकी बातों पर सहमती व्यक्त करते है। व्यवसायी राजेन्द्र प्रसाद बरनवाल व डा0 अनिल कुमार गुप्त यातायात के किरायों में वृद्धि व गांव की सड़कों की दुर्दशा को भी व्यवसाय में आयी गिरावट का अहम कारक मानते हैं।

But some other reasons also included, no proper access road inside the old market, goon type behavior of local shop owners, no place for parking etc. Are other reasons.
Respective family type people ignore local market and choose far markets because of that.