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एंटरटेनमेंट की वजह से घोसी में पीछे छूट रहा डेवलपमेंट का मुद्दा

विकास सिंह निकुम्भ…


मऊ। किसी ने सच ही कहा है कि लोगों को डेवलपमेंट से ज्यादे इंटरटेनमेंट पसंद है, इसका ताजा उदाहरण घोसी लोकसभा की सीट बनी हुई है। दर्जन भर से अधीक प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन किसी भी प्रत्याशी ने मीडिया में या लोगों से यह नहीं बताया की चुनाव जीतने के बाद घोसी के लिए के वह एक बड़ा काम क्या करगें जिसका सपना घोसी की जनता कल्पनाथ राय के जाने के बाद से देख रही है। ये वही घोसी है जो राय साहब के समय में विकास के लिए जानी जाती थी, यह वह समय था जब डेवलपमेंट के मामले में मऊ बनारस और गोरखपुर को पीछे छोड़ रहा था, आज उसी घोसी का विकास बयान बहादुरों और जुमलेबाजों के थोथले व चोचले बयानों के चंगुल में फंसकर दम तोड़ रही है।
दो प्रमुख दल जिसमें सीधी टक्कर मानी जा रही है, उनमे से एक नेता सुबह कुछ मजेदार बयान दे देता हैं, जिससे मीडिया को मसाला और जनता को मजा मिल जाए, कुछ समय बाद दूसरे दल के नेता इसका खंडन करते हैं और कुछ अलग मसाला मीडिया को और अलग मजा जनता को दे देते हैं। इन सब के बीच घोसी लोकसभा के असल मुद्दे क्या है इसकी कोई बात ही नहीं करता। क्या जिले के बुद्धिजीवियों की ये जिम्मेदारी नही है कि अगर चुनाव लड़ने वाले नेता लोगों का ध्यान डेवलपमेंट के तरफ से हटकर इंटरटेनमेंट की तरफ ले जा रहे हैं तो जिले के मतदाताओं को जागरूक करें जिससे लोग अपने विकास की बात करें, की वो भी कहने मात्र के लिए ही बुद्धिजीवी रह गये है। एक समय ऐसा था जब लोकसभा के चुनाव में मऊ को सिंगापुर बनाने की बात होती थी और आज क्या बातें हो रही हैं यह हमारे और आपके सामने है, देखा जाए तो जिले के एक तरफ प्रधानमंत्री का क्षेत्र है और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का और जिले से जुड़े प्रदेश सरकार में इस समय तीन कैबिनेट मंत्री हैं फिर भी मऊ की यह दुर्दशा हम सबके सामने एक विचारणीय प्रश्न बनकर खड़ा है।

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