आठ मोहर्रम क़ा जुलुस हर साल की तरह इस साल भी अपने परम्परागत तरीके से निकला
मऊ। जिले के शहर मे गुरुवार को इमाम हुसैन के पुत्र हजरत अली अकबर की शहादत को याद किया गया। स्याह लिबास पहन अजादारों ने इमाम के 18 बरस के जवान बेटे को पुरसा दिया।
आठ मोहर्रम क़ा जुलुस हर साल की तरह इस साल भी अपने परम्परागत तरीके से निकला जिसमें अंजुमन बाबुल इल्म जाफरिया ने नौहाख्वानी व सीनाजनी पेश क़ी जुलुस ताजियेदार सैय्यद अली अंसर के मकान से निकलकर सीनाजानी व नौहख्वानी करते हुए जुलूस शिया मास्जिद होते हुए मलिक टोला इमामबाड़ा मे जाकर समाप्त हुआ। जुलुस के फ़ौरन बाद घोसी से आए मौलाना नसीमुल हसन साहब ने अली अकबर की शहादत को बयान किया और बताया की मजलिस में आने पर सबसे ज्यादा सवाब होता है। बाकी सारी नेकियों का हिसाब फरिश्ते रखते हैं लेकिन मजलिस में शामिल होने का हिसाब इमाम हुसैन की मां फात्मा जहरा करती हैं। मजलिस में आकर समय बर्बाद नहीं होता बल्कि दुनिया के किसी काम को करने में इससे ज्यादा सवाब नहीं मिल सकता।
जिसमे मुख़्य रूप से ताजियेदार व मोहतवल्ली सैयद अली अंसर, शुजात अली, आयान आमान, मंसूर आज़म, फैजी, जावेद, , रेहान, फरहांन, तामिर खान, परवेज, वसीम खान, जहीर खान आदि लोग मौजूद रहें।

