रचनाकार

“आशाएं” : देश को आजाद कौन पढ़ता है, आजकल अखबार कौन पढ़ता है

@ अभिलाषा अग्रवाल…
आजकल अखबार कौन पढ़ता है
बिना बहस समाचार कौन पढ़ता है
चैनल बदल बदल के हम देख देगे
हाथ में लेकर एक बार कौन पढ़ता है
अपशब्दो की भाषा आती
अच्छे अच्छे किरदारो से
इतना नपा तुला संस्कार कौन पढ़ता है
जरूरत होगी पेपर की तो बिछाने को
तो पड़ोस से मांग लेगे
इतना सस्ता समाचार कौन पढ़ता है
परीक्षा की तैयारी में समाचार
दिखाएगे बच्चों को टी.वी. में यह लड़ने वाला
शांत कमजोर लाचार कौन पढ़ता है
नही फालतू खबर छापते मजा नही मिलता है फिर
झूठ के जमाने में अब यह
सच का आसार कौन पढ़ता है
भाषा सीखी पढ़ना तेजी से हमने
इन अखबारो से ही तो
सुनने का जमाना है
आंखो का इस्तेमाल कौन करता है
चाय के साथ पेपर था पहले
खबरे हम सुनाते थे श्री मति को
ये काम जब चैनल चिल्ला कर देते है तो
ऊर्जा अपनी बेकार कौन करता है
जिन खबरो को बार बार देखके
दिन खत्म हो जाता है
उन्हें एक ही पहरे में पूरा एक बार कौन पढ़ता है
आजादी आई थी इन अखबारो से पहले
बंधन में हम टी.वी., मोबाइल के
देश को आजाद कौन पढ़ता है
आजकल अखबार कौन पढ़ता है

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