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जिला अस्पताल में डीएम का औचक निरीक्षण, चिकित्सक सहित स्टाफ नर्स व न्यूट्रीशियन की सेवा समाप्त करने का दिया निर्देश

● जिलाधिकारी के कड़े तेवर, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी सहित चिकित्सक के खिलाफ शासन को पत्र

मऊ। जिलाधिकारी प्रकाश बिन्दु द्वारा मंगलवार को जनहित की समस्याओं व शासन की अपेक्षाओं को लेकर पूरे फार्म में नजर आये। उनके तेवर व कड़े फैसले के बाद सरकारी कर्मियों व आम जनता के बीच चर्चा का बाजार तेज हो गया। ऐसे में लोग जिलाधिकारी के इस तरह के औचक निरीक्षण की तारीफों के पूल बांधते नजर आयें। अब देखना है कि उनके इस तरह के कार्यवाही पर जनहित से जुड़े सम्बन्धित विभाग के कर्मियों पर कितना असर, कितने दिनों तक पड़ता है। मंगलवार की दोपहर 12 बजे दिन में जिलाधिकारी प्रकाश बिन्दु जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने धमक पड़े, निरीक्षण के समय भर्ती मरीज किरन से जैसे ही उन्होंने दवा व ईलाज के बारे में पूछा तो वह बोल बैठी की उसे तो डा0 ए0के0 राय ने बाहर से दवा लिखी है, इस बावत जब जिलाधिकारी ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी से पूछा कि यह दवा है या नहीं, तो स्टोर में देखने से पता चला कि दवा उपलब्ध है। फिर क्या इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी बृज कुमार व डा0 ए0के0 राय के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए शासन को पत्र लिखने के निर्देश दिये। उसके बाद जिलाधिकारी जिला अस्पताल परिसर में ही शिशु पुर्नवास केन्द्र पंहुचे जहॉ अतिकुपोषित बच्चों को जो बीमार है उन्हे निःशुल्क चिकित्सा की जाती है तथा उसके अभिभावक को भी कुछ पैसे मिलते हैं। वहॉ कोई बच्चा नहीं मिला जबकि जिलाधिकारी ने अपनी चौपाल चिरैयाकोट से एक बच्चें को तीन दिन पहले भेजा गया था उसका कोई रिकार्ड भी नही था।
जिलाधिकारी ने वहॉ के डा0 एम0पी0 सिंह, तारा- स्टाफ नर्स, पूजा- न्यूट्रीशियन की सेवा को समाप्त करने के निर्देश दिये। जिला अस्पताल
में एक महिला ने बताया कि दो दिन से उसका एक्स-रे नही किया जा रहा है तथा एक मरीज किरन ने बताया कि ब्लड जांच के लिए 120 रूपये लिया गया जिलाधिकारी ने एक्स-रे टेकनिशियन एन0के0वर्मा एवं ब्लड टेकनिशियन दरोगा सिंह के खिलाफ
कार्यवाही करने के निर्देश अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को दिये। जिलाधिकारी ने जिला अस्पताल में बाहर फेके हुए सामान के लिए कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
जिलाधिकारी ने अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को अस्पताल में साफ-सफाई ठीक कराने के निर्देश देने के साथ ही कहा कि यदि किसी मरीज को बाहर की दवा लिखी जाती है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी तथा इस सबके लिए अपर मुख्य चिकित्साधिकारी उत्तरदायी होंगे। उक्त अवसर पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला विकास अधिकारी सहित सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।
जिला अस्पताल के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी के जाते ही पूरे अस्पताल में कर्मचारी, चिकित्सक अपनी अपनी सेवाओं को लेकर मुस्तैद हो गए हैं। ऐसे में जिला अस्पताल के कर्मियों को सोचना चाहिए कि उन्हें किस बात का शासन तनख्वाह देता है और वह अपनी ड्यूटी को क्यों नहीं जिम्मेदारी के साथ निभाते हैं। अब देखना होगा कि जिलाधिकारी का कुछ कर्मियों के ऊपर कारवाई करने के निर्देश का असर, अन्य कर्मियों पर कितने दिन रहता है।

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