गाजीपुर की बेटी स्नेहा को अमेरिका में ढाई करोड़ का पैकेज


( विकास राय/आनन्द कुमार )
सपनों को पंख लगे और पंख को उड़ान मिले और उड़ान ही मेरे जीवन की मंजिल हो, और उड़ान ही मेरे जीवन का हर लक्ष्य हो, कुछ ऐसे ही सपने को संजो कर अपने माता-पिता के आशीर्वाद को लेकर आगे बढ़ी तो बढ़ती ही गई स्नेहा। और एक दिन वे वह करके दिखाई जो उसने सोचा था। पढ़ाई जिसका जुनून हो लक्ष्य जिसकी मंजिल, मां बाप का प्रेम जिसके लिए भगवान का सीधे आशीर्वाद उसे आखिर उसके मंजिल से कौन दूर कर सकता है। अपनी मंजिल को पा कर मां-बाप के सपनों को ही नहीं बल्कि पूरे गाजीपुर सहित पूर्वांचल का नाम रोशन किया है गाजीपुर की बेटी स्नेहा सिंह ने।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद के कुंडेसर निवासी संजय सिंह उर्फ बब्लू सिंह की पुत्री स्नेहा सिंह को अमेरिका के टॉप कंपनियों में शामिल सेल्स फोर्स में ढाई करोड़ सालाना पैकेज पर जॉब मिला है। इसे सुनकर न सिर्फ स्नेहा बल्कि परिजनों से लेकर गांववासी, जनपदवासी, दोस्त मित्र, शुभचिंतकों व रिश्तेदार खुश हैं। सभी स्नेहा के इस कामयाबी पर हर्ष में झूम रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक मूलरूप से गाजीपुर के कुंडेसर निवासी संजय सिंह उर्फ बबलू सिंह मार्टिन चिल्ड्रेन एकेडमी नाम से स्कूल चलाते है। जो कि गाजीपुर के मुहम्मदाबाद और भांवरकोल में संचालित है। संजय सिंह की दो संतान एक बेटा और एक बेटी है। बेटा तुषार सिंह यूएसए में बिल डाट काम कम्पनी में इंजीनियर है। उसका एक लाख 75 हजार डालर का पैकेज है। स्नेहा की मां श्रीमती नेहा सिंह मार्टिन चिल्ड्रेन स्कूल भांवरकोल, मुहम्मदाबाद की संचालिका है। पिता संजय सिंह व माता नेहा सिंह ने कभी भी बेटे व बेटी में फर्क नहीं समझा। स्नेहा के पिता ने समाज में बेटियों को कमतर समझने वालों को सीख दी है। स्नेहा हाई स्कूल व इण्टरमीडिएट वसंत कन्या विद्यालय राजघाट वाराणसी और बी टेक एवीआईटी चेन्नई से तथा मास्टर आफ कंप्यूटर इंजीनियरिंग केलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से की हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार स्नेहा को नामचीन अमेरिकी कंपनी सेल्स फ़ोर्स में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर के पद पर ढाई करोड़ के सालाना पैकेज पर नियुक्ति मिली है।
इस सफलता के बाद स्नेहा ने बताया कि मन में अगर कुछ कर पाने की जिद्द हो तो वह मंजिल कतई दूर नहीं है। उसे हर इंसान पा सकता है। उन्होंने पढ़ने वाले छात्र छात्राओं से कहा कि वह अपने पढ़ाई से कभी निराश ना हो। अगर नंबर कम आता है तो वह अगली कक्षा में बेहतर नंबर का प्रयास करें। मन को अगर मजबूत रखकर अपने लक्ष्य के प्रति आगे बढ़ते रहेंगे तो उन्हें सफलता जरूर मिलेगी।



