रचनाकार

…इक कहानी मिली

@ भास्कर राय…

तुम मिले तो नई
इक कहानी मिली
हिज्रे गुल को नई
जिंदगानी मिली !
दर बदर घूमते
थे कभी जो यहां
उन्हें प्यार की
राजधानी मिली…॥
रोशनी को तरसती
हुई आंख को,
आपको देखकर
के रवानी मिली।
दर पे नजरे इनायत
हुईं इस कदर,
बारगाहे सुखन
को जवानी मिली।
तेरी यादों में पुरनम
हुई आंख जब,
तेरी उल्फत की
ही पासबानी मिली।
झूठ को सच समझ
कर मैं थामे रहा,
जो मोहब्बत मिली
मुंह जबानी मिली।

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