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राजभर समाज के लोगों ने बनाई नई राष्ट्रीय सत्याग्रह पार्टी, रामलाल राजभर बने राष्ट्रीय अध्यक्ष

मऊ। राजभर दलित पिछड़े वर्ग के लोगों की अति आवश्यक बैठक राजभर बस्ती, ताजोपुर, मऊ में सम्पन्न हुयी। सुभासपा, भाजपा, बसपा सपा, कांग्रेस,  से आहत व निराश राजभर समाज के लोगों ने विकल्प के रूप में ‘‘राष्ट्रीय सत्याग्रह पार्टी’’ के गठन पर विचार किया व सर्वसम्मति से रामलाल राजभर को राष्ट्रीय सत्याग्रह पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनित किया गया। मनोनित राष्ट्रीय अध्यक्ष रामलाल राजभर ने कहा कि आजादी के 74 साल बाद आज भी राजभर समाज की स्थिति वैसी ही है जैसी अंग्रेजी शासन में हुआ करती थी। अंग्रेज सन् 1853 में एक काला कानून बनाकर चले गये जिसमें भर राजभर मुसहर पासी खटीक बंजारा, मल्लाह बिन्द, नोनिया आदि दलित पिछड़ी जातियों को अपराधिक जातियाॅ घोषित कर दिया गया। जब अंग्रेजी शासन था  तब भी इन जातियों को आतंकवादी व उग्रवादी की भाॅति धर पकड़ व चालान जेल भेज दिया जाता था । आज भी इन जातियों का वही हश्र है कि जाति के आधार पर थाना तहसील और ब्लाक पर सुनवाई होती है।

उन्होने कहा कि इन गरीब जातियों को थाने में जानवारों एवं दोयम दर्जें की भाॅति सम्मान मिलता है। पैसा वसूलने की खातिर थाने में गाली मार पीट धमकी और तरह तरह की मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ती है। श्री राजभर ने कहा कि सभी दलो मंे राजभर निषाद, दलित पिछड़े वर्ग के रहनुमा व प्रतिनिधि है फिर भी इन उपेक्षित जातियों का कोई रहनुमा नही बन पा रहा है और न कोई पार्टी ही सच्ची रहनुमाई कर पा रही है। आरक्षण हक हिस्सा अधिकार और सम्मान की माॅग करने पर लखनऊ गाॅव गली जिला जवार पर लाठियाॅ ताने और रूसवाई मिल रही है। ऐसे में विकल्प के रूप में राष्ट्रीय सत्याग्रह पार्टी का निर्माण जरूरी समझा गया है ताकि सपा बसपा कांग्रेस व भाजपा से उब चुकी जनता को विकल्प मिल सके। उनहोने कहा कि उ0प्र0 के 2020 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय सत्याग्रह पार्टी विकल्प के रूप में उभरेगी व जनता का विकल्प तो बनेगी ही सरकार बनाने विगाड़ने में भी विकल्पों का विकल्प बनेगी । उन्होनें राजभर सहित सभी दलित पिछड़ों वर्ग के लोगों से सत्याग्रह पार्टी को मजबूत करने और लामबन्द होकर आजादी की दूसरी लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।
अध्यक्षता दिनेश राजभर व संचालन सीमा भारद्वाज ने किया। बैठक में अजय बनवासी, राजकुमार बनवासी, सत्यनारायण पासवान, गोविन्द राजभर, संतोष साहनी, शम्भू मुरारी राम, धर्मराज साहनी, विनोद यादव, सुनीता सिंह, संगीता कमारी आदि रहे।

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