मिसाल-ए-मऊ

मऊ के आनन्द राय, महाराष्ट्र की सियासत का बड़ा नाम है

मिसाल-ए-मऊ’का कारवां आगे बढ़ रहा है. हमने मऊ के उस चेहरे को ढूंढ निकाला है. जिसका नाम नहीं काम बोल रहा है. वो भी बिना किसी शोर के| और अब वो दिन भी दूर नहीं, जब हम अपने इस लाल को महाराष्ट्र की सियासत में बड़ी भूमिका में देखेंगे.

हौसला जितना बुलंद होगा, मेहनत जितनी कड़ी होगी, सपने जितने बड़े होंगे, लक्ष्य अगर तय होंगे. तो आसमा कदम चूमेगा, शख्सियत उतनी बड़ी होगी, मंज़िल सामने होगी, दुनिया राह देखेगी।
ये वो चंद पंक्तियां हैं जो मऊ के लाल आनंद राय की ज़िंदगी को अपने अंदर समेटती है।

आनन्द राय मऊ न्यूज़

मऊ के घोसी में पैदा हुए आनंद राय अब देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं। और मुंबई प्रदेश कांग्रेस में सचिव के पद पर बखूबी अपनी ज़िम्मेदारियां निभा रहे हैं।

Anand kumar apna mau

अपना मऊ के सम्पादक आनंद कुमार ने जब उनसे बात की तो उन्होंने अपने बारे में बताया कि वो एक साधारण इंसान हैं। और सामान्य, सामाजिक जीवन जीने में यकीन करते हैं। अपने छोटे से परिवार के साथ वो समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को अपने जीवन का लक्ष्य बताते हैं। वो कहते हैं उन्होंने जो कुछ भी अपनी जिंदगी में हासिल किया है। वो सब उनके मां-पिता के आशीर्वाद से संभव हो सका है।
वो बताते हैं कि ज़िन्दगी में चुनौतियां तो बहुत आईं लेकिन तय लक्ष्य और अपनों के प्यार से हौसला मिलता रहा।
प्रारम्भिक शिक्षा उत्तर प्रदेश से पूरी करने के बाद 1991 में वो आगे की पढ़ाई के लिए महाराष्ट्र के भुसावल आ गए जहां से इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक से पॉलिटेक्निक करने के बाद 1996 में नौकरी की तलाश में वो मुम्बई पहुंच गए। और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मुंबई में लगभग दो साल नौकरी करने के बाद उन्होंने रिएल स्टेट क्षेत्र में खुद का काम शुरू किया। और थोड़ी मुश्किलों के बाद उन्हें सफलता मिलने लगी। अपना काम होने की वजह से वो किसी दबाव में नहीं थे। यही वजह थी कि वो सामाजिक क्षेत्र में अपना योगदान देने लगें।

Kalpana rai apnamau

सामाजिक कार्यों के दौरान ही उनका रुझान राजनीति में बढ़ने लगा. और अपनी धरती और मऊ के जनक कल्पनाथ राय को आदर्श मानकर वो राजनीति में कूद पडे. वो बताते हैं कि इस दौरान वो कल्पनाथ राय के संपर्क में थे और जब भी कल्पनाथ राय मुंबई पहुंचते थे। तो उनसे वो मुलाकात जरूर करते थे। अपनी राजनीतिक कुशलता से वो सियासी क्षेत्र में भी तरक्की करने लगें और कुछ ही दिन बाद वो मुम्बई में युवा कांग्रेस में जिला महासचिव बन गए। वो बताते हैं कि कल्पनाथ राय को वो नेता जी कहते थे और नेता जी उनका हौसला हमेशा बढ़ाते थे। लेकिन असमय नेता जी के चले जाने से ऐसा लगा कि जैसे सब कुछ खत्म हो गया। मगर उनके दिखाए रास्ते, परिवार, प्रियजनों के प्यार और आर्शीवाद से आगे बढ़ने का हौसला मिलता रहा। और कुछ ही दिन बाद इसका असर दिखा और वो मुम्बई प्रदेश कांग्रेस की राजनीति तक पहुंचने में कामयाब हो गए। आज महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी अलग पहचान है. लेकिन उनका दिल अब भी अपने गांव, अपनी धरती के लिए धड़कता रहता है। वो अपने नेता जी के अधूरे सपनों को पूरा करना चाहते हैं. मऊ के विकास की जो गंगा बहाने का सपना स्वर्गीय कल्पनाथ राय जी ने देखी थी वो सपना उन्हें बेचैन करती है. जिसको पूरा करने का लक्ष्य उनके जीवन का एक उद्देश्य है.


वो बताते हैं कि उत्तर भारत और पूर्वांचल से बहुत लोग नौकरी और व्यवसाय की तलाश में मुंबई आते हैं। ऐसे लोगों कि मदद करने से वो कभी पीछे नहीं हटते. वो हर संभव उनकी मदद करते हैं. वो कहते मैं भी ख़ुद उन मुश्किलों से गुज़रा हूं। इसलिए उनका दर्द अच्छे से समझता हूं।
अपने लोगों की मदद के लिए उन्होंने पूर्वांचल पीपुल्स फ़्रंट नाम का एक संगठन भी बनाया है। जिसके जरिए वो लोगों की हर संभव मदद करते हैं। पूर्वांचल से जुड़े लोगों के ग़रीब बच्चों का स्कूल में प्रवेश, अस्पतालों में ज़रूरत पड़ने पर मदद, उनके लिए रोज़गार, आर्थिक रूप से कमज़ोर लोंगों की बच्चियों की पढ़ाई में आर्थिक सहयोग,जितना सम्भव हो कमज़ोर परिवारों के साथ खड़े रहने की कोशिश उनकी संस्था और वो खुद करते हैं।

Congress apnamau


आनन्द राय बताते हैं कि कल्पनाथ राय और कांग्रेस से उनका गहरा लगाव है। और कांग्रेस की राजनीति उनको विरासत में मिली थी. वो बताते हैं कि देश की आजादी के लिए उनके पिता ने आज़ाद हिंद फ़ौज के लिए सिंगापुर में कार्य किया था। और उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा जी के बहुत बड़े प्रशंसक थे. इसलिए भी कांग्रेस और उसकी विचारधारा से वो बचपन से ही प्रेरित थे. यही वजह थी कि मुम्बई जाने के बाद वो काम के साथ-साथ कांग्रेस से भी जुड़ गए। और तब से कांग्रेस के सच्चे सिपाही की तरह अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ निभा रहे हैं। इस दौरान उन्हें अन्य दलों से बड़े पदों पर आने का न्यौता भी मिला लेकिन उन्होंने सम्मानपूर्वक किसी और दल में जाने से मना कर दिया.

सौ- दैनिक जागरण


वो कहते हैं जहां तक बात दल छोड़ने की है तो उसका जवाब सिर्फ़ दो ही है। एक तो कांग्रेस पार्टी की विचारधारा और दूसरा स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरु से लेकर स्वर्गीय राजीव गांधी का इस देश के लिए समर्पण और बलिदान।
वो कहते हैं मुझे हमेशा गर्व है, और रहेगा कि मैं उस कांग्रेस परिवार का हिस्सा हूं। जो कभी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय की राजनीति नहीं करती है। कांग्रेस एक समाजिक एकरूपता और वैज्ञानिक सोच की पार्टी है। मुझे गर्व है कि मैं कांग्रेस पार्टी का छोटा सा सिपाही हूं। मैं कांग्रेस के विचारधारा के साथ आजीवन रहूंगा। मेरे लिए कोई भी पद प्रतिष्ठा कांग्रेस पार्टी की विचारधारा के सामने कोई मायने नहीं रखती है।
इन्हीं शब्दों के साथ उन्होंने अपनी बात खत्म की और अपना मऊ की टीम और संपादक आनन्द कुमार को इस इंटरव्यू के लिए आभार जताया।

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अपना मऊ की टीम आनंद राय को इस इंटरव्यू के लिए कीमती वक्त निकालने के लिए धन्यवाद देती है. और उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देती है.

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