कवि
■ ओमा The अक्@
“कवि वह है
जो विराट के समक्ष
क्षुद्र को हाशिये पर जाने से बचाए!
वह कैसा कवि है
जो समय के दंश
अपराध
शोषण
भूख
लाचारी
ग़रीबी
के विरुद्ध स्वर नही दे सकता!
अपितु बैठा
पाँव पर पाँव चढ़ाए
केवल-
वसंत
कलिका
वेणी
शहद
चुम्बन
यौवन
आलिंगन
स्वेद
के कामपीड़ित पद्य-वमन करता है!
अथवा-
रोता है अपना रोना
अपना दुःख
अपनी नींद
अपनी भूख
अपना खोना!
निःसन्देह!
साहित्य की पुस्तकों में
इसे भी कवि कहा जाएगा
और काम-विकृत पाठकों का
असीम सम्मान भी ले जाएगा
परन्तु यह भाषा का भडुआ
कविता को
उसकी सुहाग सेज पर
एक नपुंसक-पति की भाँति
मरने को छोड़ जाएगा..!!”
1 जून 2021

