10 मिनट में 58 दुपहिया, 15 कार, 12 साइकिल, 11 रिक्शा, 05 आटों व पैदल सहित आए-गए 190 लोग
■ ऐसे तो खुलेआम उड़ा रहे हैं लोग लॉकडाउन की धज्जियां, शासन प्रशासन को ही नहीं जनता को भी होना होगा जागरूक
( आनन्द कुमार )
मऊ। उत्तर प्रदेश की सरकार और मऊ जिला प्रशासन भले ही लॉकडाउन लगाकर लोगों को घरों में कैद रहकर कोविड-19 का पालन करने का आदेश जारी कर दिया है। लेकिन सड़कों पर जो सूरत ए हाल दिखाई दे रहा है वह कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। लॉकडाउन लगे 20 दिन से ज्यादा हो गया लेकिन शुरू के कुछ दिनों को छोड़कर सड़कों का जो हाल है वह कहीं से नहीं लगता की पूर्णरूपेण लॉकडाउन है। वैसे तो यह केवल सरकार और प्रशासन की ही जिम्मेदारी नहीं है कि हम कोरोना महामारी को देखते हुए लॉकडाउन के नियमों को ठीक से पालन करें यह जिम्मेदारी तो आम जनता की भी है। लेकिन आम जनता के जो आंकड़े नजर आ रहे हैं वह स्थिति और भी भयावह है। आपको लॉकडाउन के इस कोरोना कॉल में हम मात्र 10 मिनट का जो तस्वीर आपके सामने रखने जा रहे हैं उसे देख कर यह कह पाना मुश्किल है कि हम लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं। यह तस्वीर शुक्रवार की अपराह्न 11:20 से लेकर 11:30 अपराह्न का है।

जिसे मैंने निजामुद्दीनपुरा स्थित डीसीएसके पीजी कॉलेज की सड़क पर 10 मिनट तक नजर रखते हुए आने जाने वाले हर एक- एक व्यक्ति और एक- एक वाहनों को एकबारगी से देखा, तो जो स्थिति दिखी वह बिल्कुल ही अलग है। मात्र 10 मिनट में कार,बाइक साइकिल, पैदल, रिक्शा, ईरिक्शा व ऑटो से 190 व्यक्ति आते और जाते नजर आएं। इनके आंकड़ों को हम अलग-अलग आपको बताते हैं। इसकी गिनती का जो मैंने केंद्र बिंदु माना वह मेरा घर था। 10 मिनट में यहां से कुल 15 फोर व्हीलर गाड़ियां गुजरी जिसमें कार, ट्रैक्टर, जीप सभी शामिल है और इसमें कुल लगभग 45 लोग बैठे थे। वहीं अगर बाइक का रूपरेखा प्रस्तुत करें तो कुल 58 बाइक गुजरे जिसमें सिंगल, डबल एवं त्रिपल सवारी मिलाकर टोटल 89 लोग सड़क पर आते-जाते मिले। साइकिल की संख्या 12 थी जिस पर 12 लोग सवार थे पैदल अगर देखा जाए तो 16 लोग आते जाते नजर आए। वहीं 11 रिक्शा व ईरिक्शा पर कुल 12 लोग नजर आए तथा ऑटो 5 की संख्या में गुजरे जिसमें 16 पैसेंजर सवार थे। ऐसे में सड़कों पर लोगों के आने जाने की सूरते हाल अगर यही रही तो जिस उद्देश्य के साथ शासन व प्रशासन ने लॉकडाउन लगाया है कोरोनावायरस पर काबू पाना आसान नहीं होगा। यह सही है कि जरूरत और आवश्यक कामों से अस्पताल आदि जाने के लिए सरकार ने लोगों को छूट दे रखी है लेकिन क्या इस प्रकार का आवागमन जो सड़को पर दिख रहा है सब आवश्यक कार्य हेतु ही आ जा रहे हैं। जबकि यह आने जाने का गिनती हमने 11:00 बजे के बाद 11:20 पर शुरू की थी ताकि दुकानों के बंद होने के बाद लोगों का आवागमन थोड़ी धीमी हो जाए। ऐसे में जब एक मोहल्ले में लोगों के आवागमन की तादाद इस प्रकार से है तो 29एनएच हाईवे या सहादतपुरा, बाल निकेतन, ब्रह्मस्थान, मिर्जाहड़ीपुरा की सड़कों का सूरते हाल क्या होगा यह तो आसानी से सोचा जा सकता है। शासन- प्रशासन के साथ-साथ जनता को भी चेतना होगा, सड़कों पर निकलने के लिए उन्हें अपने पैरों को आराम देना होगा। 01 दिन के काम के लिए जरूरी नहीं कि एक ही दिन निकला जाए 4 दिन का काम लेकर 01 दिन भी निकला जा सकता है। अस्पताल, दवा, इलाज के लिए तो सभी को आने जाने दिया जाना चाहिए लेकिन सड़क पर सभी दवाई लेने निकले हैं यह कहीं से भी मानने योग्य बात नहीं है। जबकि प्रशासन नित्य ऐसे लोगों का चालान भी कर रहा है लेकिन उसके बाद भी लोग ढिठाई करने से बाज नहीं आ रहे हैं।


