पार्ट-4 “तजुर्बा-ए-अगुअई” (योग्य वर की तलाश )
( उज्ज्वल )
लड़का रेलवे में गुड्स गार्ड है। लड़के की ओर से कोई फरमाइश नहीं है। लड़के के पिता को ज्यादा नहीं 41 लाख नगद और एक कार चाहिए।एक दम ताजा मामला है। योग्य वर की तलाश में अपने घर से कोई 85-90 किलोमीटर दूर नवादा जिला मुख्यालय पंहुचा। लड़की के अभिभावक को सरकारी नौकरी वाला ही दूल्हा चाहिए। इधर सरकारी वाले का रेट देने की खुद की हैसियत तो है नहीं। विरासत में जो जमीन मिली है, उसी को बेच कर सरकारी नौकरी वाला दूल्हा ढूंढा जा रहा है।
दूल्हा भारतीय रेल में गुड्स गार्ड की नौकरी कर रहा है। छुट्टी में घर आया हुआ था। इसलिए लड़के को देखने-परखने के हिसाब से हमलोग पंहुचे थे। दोपहर करीब दो-ढाई बजे हमलोग होने वाले दूल्हे के घर पंहुच गए थे। जाते ही नाश्ता परोसा गया। अभी नाश्ता चल ही रहा था कि इसी लड़के के लिए अगुआ का दो ग्रुप और बाहर इंतजार कर रहा था। ऐसे में तो दूल्हे के रेट बढ़ना तो स्वाभाविक ही है। दूल्हे का पिता इन दिनों गर्व से अपना सीना चौड़ा किये घूमता फिरता है। हम लोग भी तो कम दिखावे में नहीं गए थे। लोकप्रिय ब्रांड महिंद्रा कीी स्कार्पियो कार से पंहुचेे थे। कहते हैं न कि वेशभूषा के आधार भी थोड़ी तवज्जो मिल जाती है। हमलोगों को घर के अंदर दूसरे कमरे में ले जाया गया। दूल्हे के पिता ने कहा कि एक साथ बैठने में ठीक नहीं लग रहा था। मुझे लगा कि दूल्हे के पिता भी कम समय में ज्यादा-से-ज्यादा अगुआ को निबटा लेना चाहते होंगे। नाश्ता तो हो ही चुका था। हमलोगों के आग्रह पर लड़के को बुलाया गया। हम पांच लोगों के बीच लड़का आया। कोई अभिभावक नहीं थे। लड़के ने शालीनता दिखाते हुए सभी के पैर छुए। पास में ही स्थान ग्रहण किया। अब बात की शुरुआत कैसे की जाए। क्या पूछा जाए। मैंने ही शुरुआत की। रेलवे की रिपोर्टिंग सालों तक की है। इसलिए थोड़ा सिस्टम को समझता भी हूँ। कई वरीय अधिकारियों से आज भी मित्रवत बातें होती हैं। इसलिए यहाँ मेरे लिए बात करना आसान था। बातें हुईं। अच्छी बातें हुईं। लड़का सच में बड़ा शालीन दिखा। सारी बातें बड़ी विनम्रता से की। मैंने मित्रवत पूछा कि आपकी कुछ अपेक्षाएं भी हो तो उसे साझा करिए। अपने जीवनसाथी को लेकर या कोई और दूसरी अपेक्षा भी। लड़के ने कहा-उसे कुछ भी अलग से अपनी ओर से नहीं चाहिए।
इसके बाद लड़के ने ही कहा कि उसकी शादी फाइनल करने के लिए उसके नाना जी अधिकृत हैं। अब लड़के ने कह दिया तब आगे किसी से क्या पूछना। फिर भी औपचारिकता वश लड़के के पिता की सहमति ली और वहां से कोई 10 किलोमीटर की दूरी पर लड़के के नाना जी के पास पंहुच गए। नाना जी सेवा निवृत्त शिक्षक रहे हैं। बोलचाल में अंग्रेजी के वाक्यों का भी इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे में मेरे साथ रहे लोग मूकदर्शक बन गए। मोर्चा मुझे संभालना पड़ा। बड़े गर्व से कह रहे थे कि पटना यूनिवर्सिटी से उन्होंने पढ़ाई की है। एक जमाने में सच में बड़ा क्रेज था पटना यूनिवर्सिटी का। हालांकि मैंने उनसे नहीं कहा कि उसी यूनिवर्सिटी से मैंने भी इंटर से लेकर पीएचडी तक पूरा किया है। उनकी बातों का शालीनता से जवाब दिया। उनकी अंग्रेजी की बातचीत का जवाब मगही में देने लगे। ऐसे में मेरे साथ रहे लोग भी अपनी-अपनी राय देते रहे। इसके बाद नाना जी मगही भाषा की राह पर आ गए।
नाना जी आज की तारीख में करोड़ों रुपये की सम्पत्ति के मालिक हैं। गर्व से बता रहे थे कि नवादा में छह-साथ कठ्ठा जमीन भी है। नाना जी ने ही लड़के को रख कर पढ़ाया था। जितनी देर हमलोग उनके पास रहे, वे अपनी संपत्ति और खूबियों का बखान करते रहे। हमलोग चुपचाप सुनने को विवश थे। बस बार-बार एक ही आग्रह हमलोगों की तरफ से कि दादा जी आप शादी की अनुमति दे दें। अंतिम-समय तक उन्होंने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। अगले दिन लड़के वालों की तरफ से सूचना मिली कि दहेज के रूप में 41 लाख नगद और एक कार देनी होगी। अब यदि अगली बार हम लोग जाएंगे तब इतना तो मान कर ही चलना होगा कि उनकी मांग पूरी कर देंगे।
क्रमशः

