रचनाकार

कितने ही सुशान्त मरे हैं, विषधर के पैमाने में…

( आशा साहनी )

महानगर के महावीर तुम
कब तक नजर चुराओगे
एक दिन ऐसा आयेगा
तुम खुद ही बाहर आओगे

संस्कार की पोल खोलती
होठों की मुस्कान तेरी
प्रशासन की पोल खोलती
वर्दी भी फाड़ी तेरी
यही तुम्हारे साथ हुआ तो
फिर कैसे बच पाओगे
महानगर के———–

कितना घात किया तुमने
प्रीत की डोरी बांधे
करते रहे ढोंग बखूबी
गा गा कर राधे राधे
राग भैरवी कैसे सिखा
नटराज कहाँ से लाओगे
महानगर के——-

कितना राज दफन हुआ है
राजमहल के दिवारों में
कितने ही सुशान्त मरे हैं
विषधर के पैमाने में
जीवन को दिखलाने वाले
अब जीवन कहाँ से लाओगे
महानगर के———-

लेेेखक- उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद की फतेहपुर ताल नरजा की रहने वाली हैैं।

आशा साहनी

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