दहेज लोभी
● अगर ये बेटियां ऐसे ही मरती रही तो ये धरती भी नहीं बचेगी
( रोशनी जायसवाल )
आज समाज जहां बहुत आगे बढ़ चुका है वहीं दूसरी तरफ कुछ बुराईयां आज भी समाज में वैसे ही बरकरार है , उन्ही में से एक बुराई दहेज है और उससे बुरा ये समाज में बैठे “दहेज लोभी” जो शायद अपनी सोच कभी नहीं बदल सकते , तो चलिए इस लेख को मैं अपने विचारों के माध्यम से आपके सामने प्रस्तुत करती हुंं, अगर इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटी हो या ये किसी के ह्रदय को आहत पंहुचाये तो मुझे नादान समझ कर क्षमा करने का कष्ट करें।

आज के समाज में दहेज इतनी तेजी से अपने पांव पसार रहा जैसे ये एक लाईलाज बिमारी हो जिसका कोई इलाज नहीं , इसी दहेज के वजह से भ्रुण हत्या ना रूकने का नाम ले रही क्यूंकि एक बेटी जब जन्म लेती तभी उसे पराया धन नाम दे दिया जाता। लड़के वाले लड़की के घर लड़की देखने नहीं बल्कि ये तय करने जाते कि उस लड़की का पिता उन्हें क्या दे सकता है अगर लड़की का पिता दहेज लोभियों की हर कीमत अदा कर सकता है तभी बात आगे बढ़ती वरना ये कहकर टाल दी जाती कि लड़की में ही कमी है, मैं जब सुबह-सुबह अखबार उठाती तो मेरी रूह काप उठती कि आज एक बेटी चन्द रूपये के लिए रद्दी कागजों की तरह जला दी गयी तो कोई बेटी जानवरों कि तरह हलाल कर दी गई।
आज प्रशासन भी इस पर चुप बैठा है ये जानते हुए भी कि अगर ये बेटियां ऐसे ही मरती रही तो ये धरती भी नहीं बचेगी, अमीर लोग अपनी अमीरी में करोड़ों खर्च कर देते जो कि एक गरीब बाप के तन का एक -एक रोआ तक बेटी के शादी में बिक जाता फिर भी ये दहेज लोभियों को इनका मकान खाली दिखता समझ नहीं आता ये अपने बेटे की शादी करने आये है या उनका सौदा करने अगर ऐसा ही होता रहा तो एक दिन समाज में बेटियां नहीं मिलेगी।
और मैं इस लेख के माध्यम से सभी माता-पिता से निवेदन करना चाहुंगी कि जितना खर्च आप अपनी बेटी की शादी में करते हैं उतना खर्च उसके पढ़ाई में कीजिए उसके सपनों को साकार करने में कीजिए तो कोई बेटी दहेज के कारण नहीं मरेगी।
पता…
सिविल लाइन भुजौटी मऊ(275101)
