शब्द मसीहा की कहानी : चलते रहो
शब्द मसीहा केदारनाथ
“अरे! थोड़ी देर रुक जाते हैं।” चलती हुई पत्नी से कहा।
“नहीं, चलते चलो । जितना जल्दी रेलवे लाइन तक पहुंचेंगे अच्छा रहेगा। अंधेरे में पल का नाका भी पार कर लेंगे । वो पुलिस को अगर पैसा दिया तो पास में फूटी कौड़ी नहीं बचेगी।” पत्नी ने जवाब दिया ।
“अरे! कम से कम मुन्ना को तो दूध पिला दे रुककर।” पति बोला।
इस बार पैर कुछ थम से गए थे । फिर भी उसने हिम्मत की और आगे चलती रही ।
“कैसी माँ हो? अरे! बच्चा है अभी भूख सह नहीं पाएगा ….दूध पिला दे इसे !”
“दो दिन से सिर्फ पानी पी रहे हैं हम …..दूध बनाने की फेकटरी नहीं हैं । माँ हैं जानते हैं उसकी हालत बिना कहे भी ….. चलते रहो।”

