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24 वर्ष पुराने हत्या के मामले में जज ने सुनाई फांसी की सजा

मऊ। दीवानी न्यायालय मऊ में आज उस वक्त चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। जब एक अधिवक्ता को 24 वर्ष पुराने हत्या के मामले में न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुना दी गई। न्यायालय ने आरोपी अधिवक्ता व उसके बहनोई को फांसी की सजा तो सुनाई ही साथ ही दोनों के ऊपर ₹110000 का अर्थदंड भी लगाया।
बताते चलें कि मऊ नगर सरायलखंसी थाना क्षेत्र के रैकवारेडीह गांव में 12 मार्च 1996 को दुबरी पांडेय नामक एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। मुल्जिमानों ने दुबरी पांडेय को उस वक्त मार दिया, जब वह अपने भतीजे अखिलेश पांडेय के साथ गेहूं का खेत देखने जा रहे थे। संपत्ति विवाद को लेकर दुबरी पांडेय के भतीजे इंद्रासन पांडे व घनश्याम पांडेय, इंद्रासन पांडे के लड़के राकेश पांडेय मिथिलेश पांडेय, दामाद यशवंत चौबे ने उन्हें पकड़ लिया। और उन्हें जमीन पर पटक दिया। उसके बाद राकेश पांडे ने दाब से वार कर उनका गला काट लिया और उसके बाद उनके दोनों हाथों का अंगूठा भी काट लिया। इस दुर्दांत हत्या को करने के बाद मुल्जिमानों ने दुबरी पांडे का सिर लेकर पूरे गांव में घुमाया और दूसरे गांव में ले जाकर एक पोखरी में सिर को फेक दिया। पुलिस ने इस मामले में मृतक के भतीजे अखिलेश पांडेय के लिखित तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया और विवेचना के उपरांत पांचों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान दो आरोपी इंद्रासन पांडेय व घनश्याम पांडेय की मृत्यु हो गई। इसलिए उनके विरुद्ध मुकदमा अवेट कर दिया गया। जबकि तीसरे आरोपी मिथिलेश उर्फ दीपू पांडेय की उम्र घटना के समय 18 वर्ष से कम होने के कारण उसे बाल अपचारी घोषित कर मामला किशोर न्याय बोर्ड में भेज दिया। परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार सिंह ने वादी मुकदमा सहित 9 गवाह को पेश किया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से भी तीन गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि दुबरी पांडेय की दुर्दांत हत्या की गई है और भय का माहौल पैदा किया गया। न्यायालय ने राकेश पांडेय व यशवंत चौबे के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर दोनों आरोपी अधिवक्ता राकेश पांडेय व यशवंत चौबे को हत्या करने का आरोपी पाते हुए मृत्युदंड की सजा से दंडित करने का निर्णय सुनाया, साथ ही न्यायालय ने ₹110000 का जुर्माना भी दोनों आरोपियों के ऊपर लगाया। न्यायालय ने कहा कि दोनों दोषियों से वसूली गई अर्थदंड की धनराशि में से 80% धनराशि वादी मुकदमा अखिलेश कुमार पांडेय के उत्तराधिकारियों को बतौर क्षतिपूर्ति अदा किया जाएगा।

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